उपभोक्ता बाजार के लिए अपना पहला इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के लिए भारत की टाटा मोटर्स लिमिटेड ने अपने प्रमुख संयंत्र पर गैर इस्तेमाल वाले शॉप फ्लोर को पुन: तैयार किया है।
कंपनी के नेक्सन एसयूवी बॉडी को गैसोलिन मॉडलों के लिए डिजाइन किया गया और इनमें हाथ से बैटरी को फिट किया गया है।
यह ऐसा सेगमेंट है जिसके तहत शुरू में सिर्फ प्रतिदिन आठ एसयूवी बनते थे। लेकिन नेक्सन ईवी की पेशकश के बाद से दो वर्षों के दौरान मांग बढ़ी है। टाटा अब प्रतिदिन 100 से ज्यादा एसयूवी वाहनों का निर्माण करती है, जिनमें से ज्यादातर को नजदीक के अन्य संयंत्र में तैयार किया जाता है।
इस कमजोर नई शुरुआत के बाद भी टाटा का देश के इलेक्ट्रिक कार बाजार पर दबदबा बना हुआ है। ईवी के लिए भारत के बगैर आजमाए हुए बाजार में प्रवेश कर रही टाटा यह जानती है कि उसे लागत पर ध्यान देने वाले लोगों के लिए किफायती कार बनानी होगी। ईवी संयंत्र बनाने के बजाय उसने मौजूदा सफल मॉडल पर ध्यान देने का फैसला किया और इसे बैटरी पैक के साथ पेश करने की दिशा में काम किया। टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में प्रोडक्ट लाइन एवं ऑपरेशंस के उपाध्यक्ष आनंद कुलकर्णी ने रॉयटर्स को बताया कि एक नए बाजार के लिए ईवी संयंत्र के लिए बढ़ती बिक्री की संभावनाओं को देखते हुए बड़े निवेश की जरूरत होगी। हम ऐसा नहीं करना चाहते। टाटा ने ईवी कलपुर्जों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के दायरे के लिए टाटा समूह कंपनियों पर निर्भरता के आधार पर प्रमुख निवेश भी सीमित रखा है और सस्ते बैटरी विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया है। इस वजह से नेक्सन ईवी की कीमत 19,000 डॉलर के आसपास रखने में मदद मिली है, जो भारत में तो ज्यादा सस्ती नहीं है, लेकिन उच्च-मध्य वर्ग के लिए किफायती है और नेक्सन गैसोलिन मॉडल के मुख्य वर्सन के मुकाबले बहुत ज्यादा महंगी नहीं है।