टाटा समूह की तमाम कंपनियों पर मंदी का असर पड़ रहा है और उन्हें नकदी जुटाने में दिक्कत हो रही है।
समूह की कम से कम पांच कंपनियां कारोबारी विस्तार के लिए अतिरिक्त शेयर बेचकर रकम जुटाने की योजना बना रही हैं। इनमें इस्पात, ऑटोमोबाइल, होटल, बेवरीज और केमिकल कारोबार से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के कार्यकारी निदेशक आरके कृष्ण कुमार ने कहा, ‘जब शेयर बाजारचढ़ने लगे हैं, तो समूह की कंपनियों टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, इंडियन होटल्स, टाटा टी और टाटा केमिकल्स के लिए पूंजी जुटाने के लिए कई विकल्प हैं।’
भारत के इस दूसरे सबसे बड़े कारोबारी समूह के लिए वर्ष 2008 एक दुखद वर्ष रहा। मुंबई में इसकी एक प्रमुख होटल परिसंपत्ति को आतंकवादियों द्वारा निशाना बनाया गया। समूह ने कहा है कि शेयरों की बिक्री शेयर बाजारों में मजबूती आने के बाद ही की जा सकेगी।
लेकिन कृष्ण कुमार को उम्मीद है कि 2009 की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार शुरू होगा। विश्लेषकों का मानना है कि 251,543 करोड़ रुपये की पूंजी वाले टाटा समूह के लिए 2009 में चुनौतियां बरकरार रहेंगी।
टाटा समूह ने पिछले साल ब्रिटेन में फोर्ड मोटर कंपनी के दो ब्रांडों जगुआर एवं लैंड रोवर का 2.3 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था। इन दोनों ब्रांडों के अधिग्रहण के लिए जुटाए गए अल्पावधि ऋणों को चुकाने के लिए टाटा मोटर्स को अब संघर्ष करना पड़ रहा है।
एंजेल ब्रोकिंग के शोध प्रमुख हितेश अग्रवाल ने कहा, ‘वित्तीय और आर्थिक रूप से टाटा समूह पर थोड़ा दबाव बना रहेगा। यह समूह अंबानी या बिड़ला जैसे समूहों की तुलना में ज्यादा मजबूत नहीं है।’
इस कठिन समय से निपटने की अपनी रणनीति के तहत समूह ने एक व्यापक समीक्षा से गुजरने के बाद अपने व्यवसायों को एकीकृत करने की योजना बनाई है।