वोडाफोन की घंटी बजाने के बाद आयकर विभाग की मुस्तैद नजर आदित्य बिड़ला और वेदांत समूह जैसे दिग्गजों पर गड़ गई है।
इन दोनों समूहों से भी क्रमश: लगभग 45 करोड़ और 900 करोड़ रुपये की बतौर कर मांग की जा रही है। विभाग ने दोनों समूहों पर भारतीय संपत्तियों की खरीद में पूंजीगत लाभ कर बचाने की तोहमत लगाई है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयकर अधिनियम की धारा 201 के तहत दोनों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिसों में इस बात का जिक्र है कि सौदों के समय उनकी कंपनियों ने कर अदायगी नहीं की।
आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी इंडियन रेयॉन ने अमेरिकी दूरसंचार कंपनी एटीऐंडटी से आइडिया सेल्युलर की 16.45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए लगभग 735 करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन कंपनी ने इस पर कर अदा नहीं किया। इसी तरह वेदांत ने जापान की मित्सुई ऐंड कंपनी ने अप्रैल 2007 में सेसा गोवा की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर 98.1 करोड़ डॉलर खर्च किए थे।
दरअसल आयकर अधिनियम की धारा 163 के तहत किसी विदेशी कंपनी के साथ जुड़े भारतीय निकाय को भी विदेशी कंपनी का एजेंट माना जाएगा और उससे पूंजीगत लाभ कर अदा करने के लिए कहा जाएगा। एटीऐंडटी भारत में पूंजीगत लाभ कर नहीं देती है।
वेदांत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में इस नोटिस को चुनौती दी है। इस बारे में वेदांत से संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला। अलबत्ता आदित्य बिड़ला समूह के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि आइडिया सौदे पर आयकर विभाग ने अतिरिक्त जानकारी मांगी है। लेकिन उसने कर की मांग से साफ इनकार किया। उसने कहा कि इस सौदे में इंडियन रेयॉन को अनापत्ति प्रमाणपत्र पहले ही मिल गया था।
आइडिया में टाटा इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने भी 2005 में एटीऐंडटी से 16.45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। उस पर भी आयकर विभाग ने मुकदमा चलाया और 45 करोड़ रुपये बतौर कर मांगे। कंपनी ने रकम तो अदा कर दी, लेकिन वह इसके खिलाफ अदालत में चली गई है। हाल ही में टाटा इंडस्ट्रीज को भी आयकर विभाग का नोटिस मिला है, जिसमें उसे एटीऐंडटी का एजेंट मानने की बात कही गई है।
पूंजीगत लाभ कर बचाने का फेर
वेदांत, बिड़ला और टाटा को आयकर नोटिस जारी
वेदांत, बिड़ला से पूंजीगत लाभ कर की मांग
वेदांत पहुंच गई कर्नाटक उच्च न्यायालय
टाटा को विदेशी कंपनी मानने के बारे में नोटिस