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ओला-उबर के लिए सख्त कायदे

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Last Updated- December 14, 2022 | 8:48 PM IST

इंटरनेट आधारित टैक्सी सेवा देने वाली ओला एवं उबर जैसी कंपनियों (कैब एग्रीगेटर) पर सरकार की निगरानी बढऩे जा रही है। ये कंपनियां अब केंद्र सरकार के नियमन के दायरे में आ जाएंगी। सरकार ने इन कंपनियों द्वारा ग्राहकों से लिए जाने वाले किराये की संरचना तय करने के दिशानिर्देश सख्त बना दिए हैं। कैब सेवाओं के परिचालन के लिए राज्यों को केंद्र द्वारा तय दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। दिशानिर्देशों का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में जुर्माने लगाए जाने का प्रावधान है। प्रावधानों के अनुसार ओला एवं उबर सहित इंटरनेट आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियां अत्यधिक मांग के समय मूल किराये से 1.5 गुना अधिक किराया नहीं ले पाएंगी।
दिशानिर्देशों के अनुसार अगर बुकिंग स्वीकार करने के बाद कैब चालक इसे रद्द करता है तो उस स्थिति में कुल किराये का 10 प्रतिशत जुर्माना (अधिकतम 100 रुपये) लगाया जाएगा। अगर यात्री बुकिंग रद्द करता है तो उस पर भी इतना ही जुर्माना लगाया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाने की स्थिति में कैब सेवा प्रदाता कंपनी का परिचालन लाइसेंस निलंबित हो सकता है। अगर यात्री से लगातार अधिक किराया वसूला जाता है और कंपनी चालक के प्रति अपनी जवाबदेरी पूरी करने में विफल रहती है तो उस स्थिति में भी लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
अगर किसी कैब प्रदाता कंपनी का लाइसेंस किसी वित्त वर्ष में तीन बार से अधिक बार निलंबित रहता है तो लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और कंपनी को तत्काल प्रभाव से परिचालन रोक देना होगा। कैब सेवा प्रदाता कंपनी यात्रियों को कैब साझा करने की सुविधा दे सकती है। हालांकि ये सेवा उन्हीं यात्रियों को दी जा सकेगी जिनके बार में सारी जानकारी (केवाईसी) उपलब्ध रहेगी। कैब कंपनी उन्हीं यात्रियों को कैब साझा करने की सुविधा देंगे जो एक ही मार्ग से होकर जाएंगे, लेकिन अलग-अलग गंतव्यों पर उतरेंगे। कैब साझा करने वाली महिलाएं चाहें तो वे केवल महिला यात्रियों के साथ इस सेवा का उपयोग कर पाएंगी। कैब कंपनियों को यह विकल्प उपलब्ध कराना होगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की संशोधित धारा 93 के तहत मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2020 जारी किए हैं। इन नए दिशानिर्देशों का मुख्य मकसद साझा यात्रा सेवाओं का नियमन करना है। इससे यातायात कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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First Published - November 27, 2020 | 11:23 PM IST

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