सॉफ्टबैंक के मुख्य कार्याधिकारी मासायोशी सोन समूह के दूसरे विजन फंड के जरिये 15 सौदों के माध्यम से भारत में 4 से 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। मामले के जानकार सूत्रों ने कहा कि सोन अब छोटे आकार और कम होल्डिंग वाली पहले से अधिक कंपनियों में निवेश करने की संभावना तलाश रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि वह अगले चरण में निवेशकों के कंसोर्टियम की अगुआई करना पसंद नहीं करेंगे।
आंतरिक स्तर पर दी गई जानकारी में सॉफ्टबैंक ने कहा कि दूसरे विजन फंड को राजीव मिश्रा की जगह अब सोन देखेंगे। मिश्रा की भूमिका कम हो गई है और वे अपना फंड बनाएंगे। मगक वह 100 अरब डॉलर के पहले विजन फंड की अगुआई जारी रखेंगे।
दूसरा विजन फंड 30 अरब डॉलर का है और इसमें जरूरत पड़ने पर राशि बढ़ाई जा सकती है। इसमें पूरी रकम सॉफ्टबैंक की ही है। पहले फंड में पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड ऑफ सऊदी अरब, मुबाडला, क्वालकॉम और ऐपल जैसे निवेशक भी शामिल थे। दोनों फंडों के जरिये देश में 11-12 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया जा चुका है।
दोनों फंडों के साथ अब भारत में सॉफ्टबैंक का प्रत्यक्ष निवेश 14 अरब डॉलर हो जाएगा। सूत्रों ने कहा कि नए फंड का औसत निवेश 15 से 25 करोड़ डॉलर होगा जबकि विजन फंड -1 में यह 90 करोड़ डॉलर था। इसके जरिये मुख्य रूप से ऐसे स्टार्टअप में निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो यूनिकॉर्न बन चुके हैं और सौदे के बाद जिनका मूल्यांकन 1 से 2 अरब डॉलर से अधिक नहीं हो। यह फंड किसी कंपनी में औसतन 10 से 20 फीसदी हिस्सेदारी के लिए निवेश करेगा, जबकि विजन फंड-1 में 40 फीसदी (ओयो के मामले में) के लिए निवेश किया गया था।
सूत्रों ने कहा कि योजना के मुताबिक इन दोनों फंडों के निवेश वाली कम से कम पांच कंपनियां इस साल के अंत तक या अगले साल बाजार में सूचीबद्ध हो सकती हैं। इनमें फर्स्टक्राई (30 फीसदी निवेश) का मूल्यांकन 2.7 अरब डॉलर है और आईपीओ से पहले वह और रकम जुटा सकती है। इसी तरह स्विगी में सॉफ्टबैंक का 10 फीसदी निवेश है और
उसका मूल्यांकन 10 अरब डॉलर है। लेंसकार्ट में 5.5 अरब डॉलर का निवेश विजन फंड-2 के जरिये किया गया है।
सॉफ्टबैंक के निवेश वाली दो अन्य कंपनियां ओयो और ओला कैब्स भी आईपीओ लाएंगी। ओयो ने अपने आईपीओ का आकार भी घटा दिया है। इन दोनों में मिश्रा के नेतृत्व में पहले फंड के जरिये निवेश किया गया था।
पहले विजन फंड के निवेश वाली कुछ कंपनियां आईपीओ ला चुकी हैं, जिनमें पेटीएम, पॉलिसीबाजार और डेलिवरी प्रमुख हैं। जोमैटो द्वारा ब्लिंकइट के अधिग्रहण से सॉफ्टबैंक की जोमैटो में 3.5 फसदी हिस्सेदारी होगी। हालांकि इन कंपनियों की शेयर बाजार में दस्तक से बहुत लाभ नहीं हुआ क्योंकि भारत सहित दुनिया भर के बाजारों में खासी गिरावट आई है। पेटीएम में 1.6 अरब डॉलर के निवेश पर सॉफ्टबैंक को वित्त वर्ष में 58.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। लेकिन पॉलिसीबाजार में 19.9 करोड़ डॉलर के निवेश से कंपनी को 40.2 करोड़ डॉलर का लाभ हुआ है।