रॉनी स्क्रूवाला द्वारा स्थापित उच्च शिक्षा स्टार्टअप अपग्रेड ने सिंगापुर की वैश्विक निवेश कंपनी टेमासेक से 12 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। यह इस एडुटेक स्टार्टअप द्वारा विदेश से जुटाई गई पहली रकम है।
सूत्रों के अनुसार, इस निवेश के साथ ही मुंबई के इस एडुटेक स्टार्टअप का मूल्यांकन 57.5 करोड़ डॉलर से 67.5 करोड़ डॉलर के बीच हो गया है। इस मामले से अवगत लोगों ने बताया कि अपग्रेड जल्द ही 1 अरब डॉलर का मूल्यांकन यानी यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर सकता है।
करीब छह साल पहले 2015 में स्थापित होने के बाद अपग्रेड का परिचालन उसके सह-संस्थापकों द्वारा पर्याप्त पूंजी वाले कारोबार के तौर पर 100 फीसदी स्वामित्व और वित्त पोषण के साथ किया जा रहा था।
अपग्रेड ने ताजा रकम का उपयोग अपनी टीम को मजबूती देने, अपने वैश्विक परिचालन को बढ़ाने, प्रौद्योगिकी एवं उत्पाद दक्षता को बेहतर करने और विलय एवं अधिग्रहण संभावनाओं को भुनाने में करने की योजना बनाई है। वह भारत में स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री पोर्टफोलियो में विस्तार करेगी और 2026 तक 2 अरब डॉलर के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारोबार को बढ़ाएगी। इससे उसे भारत में उभरते वैश्विक उच्च शिक्षा एडुटेक कंपनी के तौर पर खुद को स्थापित करने में मदद मिलेगी।
अपग्रेड के सह-संस्थापक रॉनी स्क्रूवाला, मयंक कुमार और फाल्गुन कोमपल्ली ने एक संयुक्त बयान में कहा, ‘हम वैश्विक कार्यबल के हरेक सदस्य को उनके करियर की सफलता के लिए ताकत देने के हमारे मिशन में टेमासेक का एक भरोसेमंद लाइफलॉन्गलर्निंग पार्टनर के तौर पर स्वागत करते हैं। यह रकम वैश्विक विस्तार के साथ-साथ भारत में गहरी पैठ बनाने संबंधी हमारी प्रतिबद्धता को महबूती देगी। हम भारत को दुनिया की शिक्षण राजधानी बनाने के अपने लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।’
क्रेडिट सुइस ने अपग्रेड के लिए विशेष वित्तीय सलाहकार के तौर पर काम किया जबकि राजाराम लीगल ने कानूनी सलाहाकार की भूमिका निभाई।
अपग्रेड शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर 100 से अधिक पाठ्यक्रमों का संचालन करती है। इन विश्वविद्यालयों/ संस्थानों में ड््यूक कॉरपोरेट एजुकेशन (अमेरिका), मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका), लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी (ब्रिटेन), डीकिन बिजनेस स्कूल (ऑस्ट्रेलिया), स्विस स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (जेनेवा), आईआईटी मद्रास (भारत), आईआईएम कोझीकोड (भारत) आदि शामिल हैं। विश्व के 50 से अधिक देशों में इसके पंजीकृत छात्रों की कुल संख्या 10 लाख से अधिक है।