सांघी समूह के दो प्रवर्तकों रवि सांघी और गिरीश सांघी ने कंपनी लॉ बोर्ड (सीएलबी) चेन्नई पीठ में याचिका दायर की है।
दोनों सांघी भाईयों ने समूह के अन्य दो प्रवर्तकों और अपने दो बड़े भाईयों आनंद प्रकाश सांघी और सुधीर सांघी को सांघी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एसआईएल)में निदेशक के पद से हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।
इस याचिका में सीएलबी से यह भी कहा गया है कि वह प्रतिवादियों और उनके परिवार के सदस्यों को एसआईएल के शेयरों में काम करने या फिर उन पर आरोप लगाने से भी रोके। एसआईएल सीमेंट उत्पादन का कारोबार करता है और उसका गुजरात के कच्छ में संयंत्र है।
यहां तक कि सांघी समूह के प्रवर्तक पारिवारिक मतभेद के चलते अलग हो रहे हैं। समूह प्रवर्तकों का यह आपसी मतभेद हाल में तब खुलकर सामने आया जब बड़े भाईयों ने दोनों छोटे भाईयों के खिलाफा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पहले दोनों बड़े भाई यह भी कह चुके हैं कि वे 25-25 प्रतिशत अपने हिस्से, जो कि समूह की परिसंपत्तियों के रूप में होगा, को लेकर अलग होने को तैयार हैं। छोटे भाईयों ने भी यह बात मानी की समूह में मालिकाना हक में फेर-बदल किया जा रहा है।
वर्ष 1978 में टेक्सटाइल और उससे संबंधित कारोबार के साथ शुरू हुए सांघी समूह ने प्रकाशन (वार्ता तेलुगु और हिंदी दैनिक पत्र), प्लास्टिक, चमड़ा और सीमेंट उत्पादन जैसे कारोबार में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। एसआईएल के अलावा समूह की एक और सूचीबध्द कंपनी सांघी पॉलिएस्टर्स लिमिटेड भी है।
सांघी समूह के पास सांघी नगर में 2,600 एकड़ के लगभग जमीन है। सांघी समूह का मुख्य कार्यालय शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। समूह की परिसंपत्तियां लगभग 10,000 करोड़ रुपये की कीमत के बराबर होंगी। समूह के एक प्रवर्तक गिरीश सांघी कांग्रेस से राज्य सभा सांसद भी हैं।