कच्चे तेल में लगी आग के चलते बुझ गए रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के पेट्रोल पंप अब फिर से रोशन होने की उम्मीद जग रही है।
इसकी वजह यह है कि गुजरात में आरआईएल की जामनगर स्थित पहली रिफाइनरी का निर्यातोन्मुखी इकाई का दर्जा खत्म हो गया है, जिससे कंपनी अब न सिर्फ 25 से 30 लाख टन डीजल सरकारी तेल कंपनियों को बेच सकती है बल्कि स्थानीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की बिक्री कर सकेगी।
इसके तहत, कंपनी अपने बंद पड़े 1432 पेट्रोल पंपों को भी दोबारा खोल सकती है। बंद होने से पहले 2006 तक कंपनी देश के कुल डीजल बाजार के 15 फीसदी हिस्से पर काबिज हो चुकी थी। कंपनी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई रिटेल स्टेशनों पर इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर हम कुछ पंप की शुरुआत कर सकते हैं। एक अन्य अधिकारी का भी कहना था कि चंद दिनों के भीतर कुछ पंपों से ईंधन की बिक्री शुरू हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और सरकारी कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी के चलते सरकारी तेल कंपनियों का मुकाबला नहीं कर सकने की वजह से कंपनी ने पिछले साल इन पेट्रोल पंपों को बंद कर दिया था।
रिलायंस की सालाना 3.3 करोड़ टन क्षमता वाली रिफाइनरी, जिसे जे-1 के तौर पर भी जाना जाता है, का निर्यातोन्मुखी इकाई का दर्जा इस सप्ताह खत्म हो गया है। जुलाई 1999 में चालू की गई जामनगर रिफाइनरी को 16 अप्रैल 2007 से निर्यातोन्मुखी इकाई में तब्दील कर दिया गया था।
कंपनी की एक इकाई रिलायंस पेट्रोलियम ने पहले से स्थापित रिफाइनरी के नजदीक दिसंबर 2008 में एक नई निर्यातोन्मुखी रिफाइनरी जे-2 चालू कर दी है। अधिकारी ने कहा कि रिलायंस जे-1 से ज्यादातर ईंधन का निर्यात करना जारी रखेगी लेकिन वह घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की बिक्री भी करेगी।
कंपनी अब सरकारी कंपनियों को भी बेच सकती है 25 से 30 लाख टन डीजल
बंद पड़े 1432 पंपों को खोलने की कवायद भी हो गई शुरू
अगले दो से तीन हफ्तों के भीतर चालू हो सकते हैं कंपनी के कुछ पंप