रिलायंस समूह द्वारा फ्यूचर समूह के थोक एवं खुदरा कारोबार का अधिग्रहण, खुदरा, थोक एवं ऑनलाइन कारोबार में अहम स्थिति पाने की कंपनी की रणनीति के साथ सटीक बैठता है।
रिलायंस की रणनीति के तीन प्रमुख अवयव हैं। रिलायंस आधुनिक खुदरा क्षेत्र में पहुंच का विस्तार करने के साथ साथ अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। कंपनी अपने खुदरा कारोबार का मूल्यांकन भी बढ़ाना चाहती है। मुकेश अंबानी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि कंपनी रणनीतिक निवेशकों की तलाश कर रही है। तीसरा, रिलायंस 3 करोड़ छोटी खुदरा दुकानों (जिसमें 60 लाख किराना दुकानें शामिल हैं) को जियो मार्ट प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठित क्षेत्र में शामिल करना चाहती है तथा उन्हें अपने प्रतिस्पर्धियों के बजाय, साझेदारों में तब्दील करना चाहती है। फ्यूचर समूह के अधिग्रहण से कंपनी को विस्तार मिलेगा। टेक्नोपैक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि देश के कुल मॉडर्न रिटेल कारोबार में 12 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी के साथ साल 2019 में 102 अरब डॉलर बाजार पूंजीकरण वाली किशोर बियाणी की फ्यूचर ग्रुप का कारोबार रिलायंस को अपनी हिस्सेदारी 16 प्रतिशत तक बढ़ाने में मदद करेगा।
इस अधिग्रहण से रिलायंस का अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले राजस्व अंतर और अधिक बढ़ जाएगा। अन्य तीन बड़ी रिटेल चेन डीमार्ट, टाटा का रिटेल कारोबार तथा कल्याण ज्वैलर्स का कुल राजस्व रिटेल किंग के राजस्व (1.2 लाख करोड़ रुपये) का लगभग आधा है। इस अधिग्रहण से रिलायंस को उम्मीद है कि कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2017 के 57,000 करोड़ रुपये का दोगुना हो जाएगा।
फ्यूचर समूह को शामिल करने से रिलायंस को 26 अरब डॉलर के रिटेल फूड ऐंड ग्रॉसरी कारोबार में अहम उपस्थिति हासिल होगी तथा कंपनी की राजस्व हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हो सकती है।
रोचक तथ्य यह है कि अभी तक इस क्षेत्र में ई-कॉमर्स कंपनियों ने अधिक रूचि नहीं दिखाई है और इसका सकल कारोबार करीब 2 अरब डॉलर सालाना है। एमेजॉन तथा फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियां भी इस क्षेत्र में छोटी कंपनियां ही हैं। इस बाजार में ग्रोफर्स तथा बिगबास्केट की काफी हिस्सेदारी है।
हालांकि यह परिस्थिति अब बदलने वाली है और रिलायंस अपने ऐप जियो मार्ट के साथ इस क्षेत्र में अहम उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। यह भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि ग्रोफर्स तथा बिगबास्केट, दोनों का अधिग्रहण भी किया जा सकता है।
करीब 20 अरब डॉलर के परिधान कारोबार में अंबानी को ई-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. फ्यूचर समूह के अधिग्रहण से कंपनी की राजस्व हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से बढ़कर 26 प्रतिशत होने का अनुमान है। फिलहाल इस क्षेत्र की आधी से ज्यादा बिक्री ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से हो रही है और रिलायंस इसमें अहम भूमिका निभाएगा। लेकिन टेक्नोपैक का कहना है कि फ्लिपकार्ट तथा मिंत्रा जैसे इसके दूसरे प्लेटफॉर्म अभी भी रिलायंस से बड़े मंच हैं।
हालांकि अभी इस बात पर विरोधाभास है कि क्या अधिग्रहण से उद्योग समेकन की ओर बढ़ेगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर कई रिटेल चेन बंद हो जाएंगी क्योंकि उनके पास न तो ज्यादा उपभोक्ता होंगे तथा न ही विस्तार हो रहा होगा।
एक सवाल मूल्यांकन का भी है। अधिग्रहण से रिलायंस को न सिर्फ विस्तार दिया है बल्कि इसके कारण कंपनी को फ्यूचर समूह की मजबूत लॉजिस्टिक्स, वितरण प्रणाली तथा वेंडर रिलेशनशिप सिस्टम भी हासिल होगी। कंपनी के बेहतर मूल्यांकन के लिए विस्तार प्रमुख कारक है।