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रिलायंस को गैस कारोबार से ताकत

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:03 AM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आआईएल) को वित्त वर्ष 2021-2022 में अपने अन्वेषण एवं उत्पादन वर्टिकल से तगड़ा लाभ मिल सकता है।
इंडिया इन्फोलाइन गु्रप (आईआईएफएल) के उपाध्यक्ष हर्ष डोले के अनुसार, आरआईएली की मुख्य गैस खोजों का व्यावसायीकरण बड़ा बदलाव लाने में अहम योगदान देगा।
डोले ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘वित्त वर्ष 2021-22 आरआईएल के लिए अपस्ट्रीम व्यवसाय के संदर्भ में बड़े बदलाव वाला वर्ष होगा। ऐसा इसलिए संभव है, क्योंकि डीपवाटर आर-क्लस्टर फील्ड दिसंबर 2020 में व्यावसायिक हो गया और इसकी क्षमता में सुधार हुआ है और इसमें समय से पहले ही व्यावसायिक सैटेलाइट क्लस्टर का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इस क्षेत्र का गैस उत्पादन पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा रहेगा।’ उन्होंने कहा, ‘एमजे क्षेत्रों के संभावित वाणिज्यिीकरण (वित्त वर्ष 2022-23 में) से गैस उत्पादन बिक्री पर परिदृश्य मजबूत दिख रहा है।’
आरआईएल को वर्ष 2023 में किसी समय तक इन तीन क्षेत्रों से प्रति दिन 3 करोड़ घन मीटर गैस उत्पादन का अनुमान है। यह भारत के उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत और देश की कुल मांग में 15 प्रतिशत होगा। आरआईएल के सालाना रिपोर्ट के अनुसार, समूह के तेल एवं गैस खोज एवं उत्पादन व्यवसाय के लिए राजस्व 33.4 प्रतिशत सानला घटकर 2,140 करोड़ रुपये रह गया। सालाना रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इसकी मुख्य वजह पारंपरिक क्षेत्रों से कम बिक्री और कम जिंस कीमत प्राप्ति थी।’
लेकिन अब इस वर्टिकल में हालात सुधरने की संभावना दिख रही है जिसका असर 2021-22 में स्पष्ट रूप से दिखेगा।
डोले ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021-22 में तेल कीमतें पिछले 12 महीने के मुकाबले ऊपर रहने की संभावना है और मांग भी बेहतर रह सकती है, क्योंकि वैश्विक रूप से अर्थव्यवस्थाएं खुल रही हैं, और बिक्री में ज्यादा गिरावट की आशंका नहीं है।’
यदि सरकार वैश्विक रुझानों के अनुरूप घरेलू प्राकृतिक गैस बिक्री कीमतें बढ़ाती है तो इसका मार्जिन वृद्घि के तौर पर भी असर दिखेगा।
ऊंची वैश्विक तेल कीमतों से रिफाइनिंग व्यवसाय में राजस्व को भी मजबूती मिलेगी। यह व्यवसाय हाल में तेल-रसायन (ओ2सी) व्यवसाय के लिए पुनर्गठित हुआ है। डोले का मानना है, ‘ओ2सी व्यवसाय में, लागत का बड़ा हिस्सा कच्चे माल से जुड़ा है, जो मुख्य रूप से कच्चा तेल है। इस हिसाब से आरआईएल का राजस्व अच्छा रहना चाहिए।’
आरआईएल के मुताबिक, ओ2सी कारोबार का राजस्व 29.1 फीसदी घटकर 3,20,008 करोड़ रुपये रह गया, जो कम वॉल्यूम व विभिन्न उत्पादों की कीमत कम मिलने के कारण हुआ। यह लगातार तीसरा साल है जब आरआईएल का राजस्व इस कारोबार से घटा है। इस साल इसमें काफी सुधार की संभावना है।
क्या ज्यादा राजस्व से मार्जिन बेहतर होगा, इस सवाल के जवाब में डोले ने कहा, आगे आरआईएल को जिंसों के वैश्विक उपभोग में बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा, जिसमें पेट्रोकेमिकल से लेकर रिफाइनरी उत्पाद शामिल हैं। मार्जिन का रुख हालांकि मिश्रित रहने की संभावना है। मौजूदा पेट्रोकेमिकल मार्जिन के सापेक्ष यह नियंत्रित रह सकता है।

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First Published - June 3, 2021 | 11:28 PM IST

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