अनिल अंबानी द्वारा प्रवर्तित और अब दिवालिया हो चुकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस परिसमापन की ओर अग्रसर होती दिख रही है। नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के आदेश से उसके ऋण समाधान को झटका लगा है। एलसीएलटी ने अपने आदेश में कहा है कि ऋण शोधन अक्षमता प्रक्रिया के तहत स्पेक्ट्रम की बिक्री तभी की जा सकती है जब सरकार के बकाये का भुगतान कर दिया गया हो। सर्वोच्च न्यायालय में यदि एलसीएलएटी के इस आदेश को बरकरार रखा गया तो आरकॉम के पास परिसमान के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
एक बैंकिंग सूत्र ने कहा कि आरकॉम के लेनदारों की समिति एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। एनसीएलएटी ने एयरसेल बनाम दूरसंचार विभाग मामले में यह आदेश जारी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एनसीएलएटी के इस फैसले के बाद एयरसेल के लिए यूवी ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (यूवीएआरसीएल) की समाधान योजना अवरुद्ध हो जाएगी जिसके लिए जून 2020 में मंजूरी दी गई थी। ऐसे में कंपनी को परिसमान में जाना पड़ेगा जिससे लेनदारों के 18,000 करोड़ रुपये के बकाये की वसूली नहीं हो पाएगी।
एक बैंकर ने कहा, ‘आरकॉम की हस्र भी वैसा ही होगा जो अपने 46,000 करोड़ रुपये के ऋण में चूक के बाद ऋण समाधान के लिए एनसीएलटी में है।’ यूवीएआरसीएल आरकॉम और आरटीएल की परिसंपत्तियों के लिए भी सफल बोलीदाता रही है। इन परिसंपत्तियों में मुख्य तौर पर स्पेक्ट्रम और रियल एस्टेट शामिल हैं। एनसीएलएटी ने पिछले सप्ताह जारी अपने फैसले में कहा है कि स्पेक्ट्रम को लेनदारों के रेहन के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि सरकार एक परिचालन लेनदार है। घनश्याम मिश्रा ऐंड संस प्राइवेट लिमिटेड बनाम एडलवाइस ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि परिचालन लेनदार लेनदारों की समिति द्वारा मंजूर समाधान योजना से ऊपर किसी भी रकम का दावा नहीं कर सकते हैं।
जाहिर तौर पर परिचालन लेनदार के रूप में दूरसंचार विभाग वित्तीय लेनदारों से पहले किसी भी एजीआर बकाये की वसूली नहीं कर सकता है। एयरसेल और आरकॉम को एजीआर बकाये के तौर पर दूरसंचार विभाग को क्रमश: 12,389 करोड़ रुपये और 26,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। आरकॉम और आरटीएल की समाधान योजना को 100 फीसदी लेनदारों द्वारा बकायदा मंजूरी दी गई है और उसे मार्च 2020 से ही एनसीएलटी के मुंबई पीठ से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
आरकॉम और आरटीएल के परिसमापन से 38 लेनदारों को करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इनमें चाइना डेवलपमेंट बैंक के नेतृत्व में चीन के बैंकों को 9,000 करोड़ रुपये, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 3,000 करोड़ रुपये और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को 3,700 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। जिन बैंकों को जून 2017 के बाद आरकॉम से एक पैसा भी नहीं मिला है उन्हें अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार है।