केजी बेसिन से दक्षिण भारत में गैस परिवहन की परियोजना के दूसरे चक्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) साथ मिलकर पाइपलाइन बिछाएंगी।
दोनों कंपनियों ने इस परियोजना पर कुल 11,300 करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना के विकास में आरआईएल जहां 2,300 करोड़ रुपये लगाएगी, वहीं गेल कुल 9,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पाइपलाइन परियोजना के 2012 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि 2007 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन दोनों कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी दी थी। आरआईएल के प्रवक्ता ने बगैर किसी विस्तृत जानकारी के बताया, ”आरआईएल इस पाइपलाइन परियोजना के मार्ग का निर्धारण कर रहा है।”
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरआईएल की सहायक कंपनी रिलायंस गैस ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को 1,140 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की अनुमति दी गई है। इसमें विजयवाड़ा-नेल्लोर-चेन्नई पाइपलाइन की लंबाई 470 किलोमीटर होगी तो चेन्नई-तूतीकोरिन पाइपलाइन की लंबाई 670 किलोमीटर होगी।
गेल इंडिया ने बताया कि वह दाभोल से बेंगलुरु और बेंगलुरु से मंगलुरु तक की 700 किलोमीटर से ज्यादा लंबी पाइपलाइन परियोजना पर 9,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। गेल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ”700 किलोमीटर की इस परियोजना को पूरा करने के लिए हमें 2012 तक का समय दिया गया है।” इस अधिकारी ने बताया कि गेल कोच्चि से बेंगलुरु की पाइपलाइन भी बिछाएगी।
मालूम हो कि रिलायंस गैस ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पहले ही पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन, जो आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा से गुजरात के भरूच तक 1,400 किलोमीटर लंबी है, बिछा चुकी है। यह पाइपलाइन गेल के हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर और दाहेज-विजयपुर पाइपलाइन नेटवर्क को गुजरात के अंकोट में, दाहेज-उड़न और दाभोल-पनवेल पाइपलाइन को जोड़ती है।