दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी के कारण भारतीय कंपनियों के प्रमोटरों ने बाय बैक और अधिग्रहणों के जरिए अपनी कंपिनयों में हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू कर दी है। गुजरात एनआरई ,हिंडाल्को, एसीसी, जीई शिपिंग और पैंटालून रिटेल जैसी दिग्गज कंपनियां अधिग्रहणों के जरिए अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही है।
जबकि बायबैक के जरिए ऐसा करने वाली कंपनियों में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, गेटवे डिस्ट्री पार्क्स, पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स, गोल्डियाम इंटरनैशनल, एसआरएफ, एएनजी ऑटो, सुराना टेलीकॉम और गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स जैसी कं पनियां शामिल हैं। इस सूची में जल्द ही देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ का नाम भी शामिल होने जा रहा है। दरअसल, डीएलएफ जल्द ही अपने शेयरों का बायबैक करने की योजना बना रही हैं।
अर्नस्ट ऐंड यंग के प्रमुख (मूल्यांकन समूह) संजीव अग्रवाल ने बताया कि कई प्रमोटरों क ा यह मानना है कि उनके शेयरों की कम कीमत लगाई जा रही है। इसीलिए उन्हें अपनी हिस्सेदारी को संगठित करने की जरूरत है। खास तौर पर जिन प्रमोटरों के पास पूंजी है वह अधिग्रहण का रास्ता अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि बायबैक से इक्विटी बेस कम होगा। प्रमोटरों द्वारा कंपनी के शेयर खरीदना दर्शाता है कि प्रमोटर को कंपनी की आर्थिक हालत पर भरोसा है।
सेबी के नियामक किसी भी कंपनी के प्रमोटर को खुले बाजार से एक वित्त वर्ष में 5 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीदने की ही इजाजत देते हैं। कई कंपनियों के शेयर काफी कम कीमत पर बाजार में होने से कई प्रमोटर ऐसा कर रहे हैं। पिछले कुछ साल में गुजरात एनआरई में प्रमोटर होल्डिंग 71 फीसदी से गिरकर 41 फीसदी ही रह गई है। यह गिरावट विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड में कमी आने के कारण है। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि अब कंपनी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कुछ ऐसा ही करेगी।
डीएलएफ के शेयरों की कीमत उच्चतम स्तर से लगभग 70 फीसदी तक गिरने के बाद कंपनी के प्रमोटरों ने शेयरों का बायबैक करने की योजना बनाई है। पिछले एक महीने में डीएलएफ के स्टॉक की कीमत में 37 फीसदी और रिलायंस इन्फ्रा के शेयरों की कीमत में 28.84 फीसदी की गिरावट आई है।
इंडिया इन्फोलाइन के उपाध्यक्ष (शोध) अमर अंबानी ने बताया, ‘बाजार की मौजूदा हालत में इक्विटी पर रिटर्न बढ़ाने से बेहतर कोई और उपाय नहीं है। जब प्रमोटरों को लगता है कि कंपनी के शेयरों की कीमत काफी कम है तो वे शेयरों का बायबैक करना शुरू कर देते हैं।’
अंबानी ने बताया, ‘जब किसी कंपनी के शेयरों की कीमत गिर रही हो और कंपनी के पास नकदी ज्यादा हो तो वह कंपनी अधिग्रहण के लिए आसानी से निशाना बन जाती है।’