घरेलू कोयले की कमी को देखते हुए निजी इस्तेमाल के बिजली संयंत्रों (कैप्टिव पॉवर प्लांट्स-सीपीपी) ने रूस से कोयला आयात बहाल कर दिया है। साथ ही कंपनियां ग्रिड से बिजली ले रही हैं। इसके बावजूद उनकी स्थिति खराब हो रही है क्योंकि देश के 30 प्रतिशत सीपीपी बंद हैं क्योंकि उन्हें एक साल से अब तक घरेलू कोयले की आपूर्ति नहीं हुई है और उनमें से ज्यादातर महंगा आयातित कोयला खरीदने में अक्षम हैं।
स्टील, सीमेंट, धातु और इस तरह के उद्योग अपने बिजली संयंत्र (कैप्टिव यूनिट्स) लगाते हैं, जिससे विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली बिजली की मांग की भरपाई कर सकें। चेन्नई की इंडिया सीमेंट्स ने कहा कि घरेलू आपूर्ति की कमी के कारण कंपनी ने पहले ही 2 शिपमेंट रूस के कोयले का आयात किया है। इंडिया सीमेंट्स के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवासन ने कहा, ‘हमारे ज्यादातर संयंत्रों में कोयला आधारित निजी बिजली संयंत्र है। इस समय निजी उत्पादन की लागत ग्रिड की लागत से ज्यादा है। इसलिए हम सभी निजी बिजली इकाइयां बंद कर रहे हैं और ग्रिड पॉवर को बहाल कर रहे हैं।’
पिछली तिमाही के दौरान इंडिया सीमेंट्स की बिजली और ईंधन की लागत में ही 54 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। उत्पादकों के मुताबिक निजी इकाइयों से बिजली की लागत 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच रही है, जबकि ग्रिड से बिजली 7 रुपये यूनिट मिल रही है। स्टील उद्योग से जिंदल स्टील ऐंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) और ऑर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया ने रूस से कोयले का आयात किया है। इंडिया सीमेंट्स ने संकेत दिए हैं कि सीमेंट दिग्गज ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया या दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आयात कर सकता है। लेकिन रूस के कोयले पर छूट मिल रही है, जिसकी वजह से वह उद्योग के लिए ज्यादा आकर्षक है।
इसके पहले खबरें आई थीं कि भारत के सबसे बड़े सीमेंट उत्पादक अल्ट्राटेक सीमेंट और जेके लक्ष्मी सीमेंट ने भी छूट वाले रूस के कोयले का आयात बहाल किया है। इंडियन कैप्टिव पॉवर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईसीपीपीए) ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि कोयला आधारित निजी इस्तेमाल के बिजली संयंत्रों ने या तो कोयले की कमी के कारण और परिचालन लागत ज्यादा होने के कारण उत्पादन बंद कर दिया है या ग्रिड से बिजली खरीदने या वैश्विक बाजार से कोयला खरीदने का विकल्प अपनाया है।