देश में मंकीपॉक्स जांच किट बनाने की तैयारी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:18 PM IST

देश की प्रयोगशालाओं से मंकीपॉक्स के चार मामलों की पुष्टि किए जाने के बाद अब देसी जांच किट बनाने की तैयारी की जा रही है। तपेदिक की जांच करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दुनिया के विशेष मंच ट्रूनैट रियल-टाइम पीसीआर के निर्माता ही मंकीपॉक्स के लिए भी जांच किट तैयार कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘मंकीपॉक्स की जांच में जिन रि-एजेंट (रसायन) का इस्तेमाल किया जाता है, वे भारत में नहीं बनाए  जाते हैं। बीमारी की जांच में इस्तेमाल किए जाने वाला जांच किट अभी अहम है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत आने वाली वायरस रिसर्च ऐंड डायग्नॉस्टिक लैबोरेटरीज (वीआरडीएल) ने भी मंकीपॉक्स के संदिग्ध मामलों की पुष्टि के लिए आयातित किट का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। फिलहाल 15 वीआरडीएल मंकीपॉक्स की जांच के लिए तैयार हैं जिनमें पुणे की नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी शामिल है।’
हालांकि भारत इस बीमारी की जांच के लिए एक देसी किट तैयार कर रहा है। गोवा की जांच कंपनी मॉलबायो डायग्नॉस्टिक जांच किट तैयार कर रही है और केंद्र इसे वैधता में मदद करेगा। सूत्र ने कहा, ‘हमने कोविड-19 के शुरुआती दिनों में देसी किट तैयार करने के लिए  कदम उठाए थे और आईसीएमआर ने इसका सत्यापन किया था। हमलोग स्थानीय स्तर पर तैयार जांच किट का भी सत्यापन करेंगे।’
मॉलबायो के संस्थापक और निदेशक तथा सीईओ श्रीराम नटराजन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जांच किट तैयार है और वह आईसीएमआर से इसके सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसकी कीमतें ज्यादा नहीं बल्कि किफायती ही होगी।
केंद्र ने मंकीपॉक्स की जांच का दायरा बढ़ाने की योजना के तहत इसे आईसीएमआर के मौजूदा 15 वीआरडीएल से बढ़ाकर 40 वीआरडीएल करने की योजना बनाई है । इसके अलावा राष्ट्रीय औषधि नियंत्रक केंद्र (एनसीडीसी) के तहत इसका दायरा 70 एकीकृत बीमारी निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) प्रयोगशालाओं तक करने का मन बनाया है।
अधिकारी का कहना है, ‘कोविड-19 की तरह मंकीपॉक्स के मामले बढ़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि यह बहुत  तेजी और आसानी से नहीं फैलता है। इसके अलावा मंकीपॉक्स के संदिग्ध नमूनों के संग्रह के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ सकती है।’ इसके द्रव नमूने का संग्रह इंजेक्शन के इस्तेमाल के साथ होता है और इसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है।
इसके अलावा निजी प्रयोगशाला भी ज्यादा पीछे नहीं हैं। देश की एक प्रमुख प्रयोगशाला श्रृंखला ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्होंने डॉक्टरों की तरफ से जांच की मांग को देखते हुए इस पर काम शुरू कर दिया है। प्रयोगशाला श्रृंखला के सीईओ ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘अगर सरकार निजी जांच की अनुमति देने का फैसला करती है तो हम भी तैयार होंगे।’

राज्य भी तैयार
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने कहा कि राज्य ने निगरानी सहित कई एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। देश में मंकीपॉक्स के पहले तीन मामले केरल से ही हैं और इन मरीजों के प्राथमिक संपर्क वाले लोगों की जांच नकारात्मक रही है।
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य सचिव प्रदीप व्यास ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि राज्य, केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुरूप ही सभी तरह के एहतियाती उपाय कर रहा है। व्यास ने कहा, ‘हम प्रमुखता से इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि इस बीमारी के बारे में सटीक सूचनाएं सबको मिलें और इसके लक्षणों के बारे में सभी लोगों को चेतावनी मिले।’

First Published : July 26, 2022 | 1:06 AM IST