वित्तीय संकट का सामना कर रही रिटेल कंपनी सुभिक्षा के कर्ज का पुनर्गठन करने में जुटी आईसीआईसीआई बैंक ने अन्य बैंकों से कहा है कि कंपनी को कॉरपोरेट कर्ज पुनर्गठन के लिए दो माह का और समय दिया जाए।
सूत्रों का कहना है कि कर्जदाताओं ने सुभिक्षा के खातों की ऑडिट के लिए अर्नस्ट ऐंड यंग को नियुक्त किया गया है। इस बीच, मद्रास उच्च न्यायालय ने सुभिक्षा में ब्ल्यू ग्रीन कंस्ट्रक्शंस ऐंड इन्वेस्टमेंट के विलय पर सुनवाई अगले दो हफ्तों के लिए स्थगित कर दी।
आईसीआईसीआई बैंक के बयान के बाद कोटक बैंक, जिसने सुभिक्षा को 40 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, उसने कहा कि वह सीडीआर कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है और न ही वह इस कंसोर्टियम में शामिल है।
सुभिक्षा के सीडीआर मसले पर आईसीआईसीआई ने कोर्ट में कहा कि वह अन्य बैंकों के साथ ऋण पुनर्गठन के बारे में बात कर रहा है। सीडीआर की अंतिम तिथि 31 अप्रैल है। सूत्रों का कहना है कि सुभिक्षा को काम-काज चलाने के लिए 300 करोड़ रुपये की तत्काल जरूरत है।
सुभिक्षा के प्रबंध निदेशक आर. सुब्रमण्यन ने कहा कि कंपनी वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है और कर्ज पुनर्गठित होने से कंपनी को कुछ मदद मिलेगी। गौरतलब है कि 260 करोड़ रुपये की कंपनी बैंकों से अपनी नेटवर्थ से तीन गुना उधार ले चुकी है। कंपनी पर करीब 750 करोड़ रुपये का कर्ज है।
आईसीआईसीआई बैंक ने अन्य बैंकों से कहा है कि सीडीआर के लिए दो माह का और समय दिया जाए