भारत में टीका विशेषज्ञ समूह के सामने तीन बार पेश नहीं होने के बाद दिग्गज अमेरिकी कंपनी फाइजर ने कहा है कि वह भारतीय नियामक की तरफ से पूछे गए सवालों का जवाब तैयार कर रही है। फाइजर उन पहली कंपनियों में से एक थी, जिन्होंने भारत में प्रतिबंधित आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन किया था।
कंपनी के प्रवक्ता ने साफ किया कि अमेरिका की यह दिग्गज कंपनी भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रतिनिधि पिछली बैठकों में इसलिए शामिल नहीं हो पाए क्योंकि ये कुछ घंटों के अत्यधिक अल्प नोटिस पर बुलाई गईं और टाइम जोन की सीमाएं भी बाधक रहीं। फाइजर के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘फाइजर ने अपने कोविड-19 टीके के आपात उपयोग की मंजूरी के लिए विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के साथ बातचीत में शामिल होने का मौका मांगा था। हालांकि कंपनी के प्रतिनिधि महज कुछ घंटों के अल्प नोटिस और टाइम जोन की सीमाओं के कारण हिस्सा नहीं ले पाए क्योंकि इसमें हिस्सा लेने वाली टीम अमेरिका में थी।’ कंपनी ने कहा कि वह मुहैया कराए गए आंकड़ों पर नियामक द्वारा पूछे गए सवालों पर जवाब संकलित कर रही है। प्रवक्ता ने कहा, ‘हम भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं ताकि इस टीके को देश में इस्तेमाल के लिए सरकार को मुहैया कराया जा सके।’ उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं कि उसके टीके की सभी के लिए समान उपलब्धता हो।
कोविड-19 विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) दवाओं और टीकों पर भारतीय औषध महानियंत्रक (डीसीजीआई) वीजी सोमानी को सलाह दे रही है। एसईसी की बैठक दिसंबर के मध्य में सीरम इंस्टीट््यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई), भारत बायोटेक इंटरनैशनल (बीबीआईएल) और फाइजर के आवेदनों की समीक्षा के लिए हुई थी। फाइजर 19 दिसंबर की बैठक में शामिल नहीं हुई। इसके बाद एसईसी की बैठक 30 दिसंबर और 1 जनवरी को हुई, जिनमें टीका विनिर्माता कंपनियों के साथ चर्चा की गई। इन बैठकों में भी फाइजर ने हिस्सा नहीं लिया था। एसईसी ने 1 जनवरी को सीरम इंस्टीट््यूट के टीके को मंजूरी देने की सिफारिश की और भारत बायोटेक से और ब्योरे मांगे, जो उसने 2 जनवरी को पेश कर दिए। डीसीजीआई ने एसईसी की सिफारिशों के बाद 3 जनवरी को दोनों टीकों को मंजूरी दे दी। एक सूत्र ने संकेत दिया कि एसईसी की अगली बैठक की अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है।
फाइजर-बायोएनटेक का एमआरएनए टीके की पहले ही अमेरिका और ब्रिटेन में शुरुआत हो चुकी है। इस टीके को माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भंडारित करना जरूरी है। कंपनी ने इसके लिए शीतभंडार शृंखलाओं के समाधान पर काम किया है, जिनमें जियो-टैगिंग के साथ आने वाले थर्मल बॉक्स आदि शामिल हैं। इसने संकेत दिया है कि वह भारत को अन्य बाजार से कम पर आपूर्ति कर सकती है। अमेरिका में इस टीके की दो खुराक की कीमत 39 डॉलर है।
केंद्र ने भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका की इस दिग्गज कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहा है। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के स्वामित्व वाला शीत भंडारण बुनियादी ढांचा कुछ जगहों पर फाइजर के टीके लिए आवश्यक तापमान की जरूरत पूरी करने में सक्षम होगा।