भारतीय फिनटेक क्षेत्र का सबसे बड़ा विलय-अधिग्रहण सौदा रद्द हो गया है। नैसपर के स्वामित्व वाली प्रॉसस ने भारत की अग्रणी भुगतान एग्रीगेटर फर्म बिलडेस्क के अधिग्रहण के लिए 4.7 अरब डॉलर के प्रस्तावित सौदे को रद्द कर दिया है। प्रॉसस के भारतीय कारोबार पेयू और बिलडेस्क के बीच इस अधिग्रहण सौदे की घोषणा 31 अगस्त 2021 को की गई थी। साथ ही 5 सितंबर 2022 को इसके लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी भी मिल गई थी।
प्रॉसस ने एक बयान में कहा, ‘इस अधिग्रहण सौदे में होने वाला लेनदेन विभिन्न शर्तों के अनुपालन पर निर्भर करता था। हालांकि इस सौदे को संपन्न करने के लिए निर्धारित तारीख 30 सितंबर, 2022 तक कुछ अन्य शर्तें नहीं पूरी की जा सकीं। इसलिए यह सौदा अपनी शर्तों के अनुसार स्वत: रद्द हो चुका है और अब प्रस्तावित लेनदेन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।’
ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है कि दोनों पक्षों के बीच बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने और प्रतिस्पर्धा आयोग से मंजूरी मिलने के बावजूद इतना बड़ा सौदा रद्द हुआ है। इस मामले से अवगत एक सूत्र ने कहा, ‘यह अचंभित करने वाली खबर है। हमने सुना है कि दोनों कंपनियों की भारतीय टीम को आज सुबह इसकी जानकारी दी गई थी।’
प्रॉसस से जब ईमेल के जरिये पूछा गया कि किन शर्तों को पूरा नहीं किया गया तो उसने कहा, ‘हम आज के अपने बयान से ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे। आपको बता दूं कि बोर्ड का निर्णय अंतिम है और अब इस सौदे पर नए सिरे से काम नहीं किया जा रहा है।’ कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि प्रॉसस भारतीय बाजार और इस क्षेत्र में अपने मौजूदा कारोबार के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।
उद्योग सूत्रों का भी कहना है कि भारतीय स्टार्टअप परिवेश के दूसरे सबसे बड़े विलय-अधिग्रहण सौदे के रद्द होने की मुख्य वजह वैश्विक बाजार में नरमी और नियामकीय परिदृश्य में बदलाव है। वॉलमार्ट द्वारा 16 अरब डॉलर के एक सौदे के तहत फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण इस क्षेत्र का सबसे बड़ा विलय-अधिग्रहण सौदा है।
वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी शेयरों में गिरावट आई है और इस क्षेत्र के स्टार्टअप का मूल्यांकन नए सिरे से हो रहा है। उदाहण के लिए स्वीडन की कंपनी क्लार्ना का मूल्यांकन 45.6 अरब डॉलर किया गया था क्योंकि उसने 2021 में सॉफ्टबैंक के विजन फंड 2 से 63.9 करोड़ डॉलर जुटाए थे। लेकिन अब मीडिया खबरों के अनुसार उसका मूल्यांकन महज 6.5 अरब डॉलर रह गया है।
जहां तक प्रॉसस का सवाल है तो उसने इस साल के आरंभ में ही इस सौदे पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया था। उस दौरान चीन की कंपनी टेनसेंट में उसका एक सबसे बड़ा निवेश प्रभावित होने लगा था। एक सूत्र ने कहा, ‘टेनसेंट में नैसपर की उल्लेखनीय हिस्सेदारी है जो चीन के कायदे कानूनों के बीच अपनी ही समस्याओं से जूझ रही थी।’ सितंबर में नैसपर ने घोषणा की थी कि वह टेनसेंट में अपनी हिस्सेदारी घटा रही है।
बिलडेस्क के प्रवर्तकों से इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए बार-बार कोशिश किए जाने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। इस सौदे को प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी मिल गई थी लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी मिलना अभी बाकी थी।