वित्तीय संकट से जूझ रही रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने बैंकों से राहत की गुजारिश की है।
कंपनी ने कहा कि उसने मौजूदा ऋण की किश्तें अदा करने के मामले में 9 से 12 महीने की मोहलत दिए जाने के लिए बैंकों से संपर्क किया है।
कंपनी ने अतिरिक्त नकदी का उपयोग मौजूदा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।
पार्श्वनाथ डेवलपर्स के अध्यक्ष प्रदीप जैन ने कहा कि हम ऋण की चालू किश्तों को नए तरीके से निर्धारित कराना चाहते हैं और किश्तों की अदायगी में 9 से 12 महीने करने की मोहलत मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयोजन के जरिए जुटाई गई अतिरिक्त नकदी का उपयोग मौजूदा परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने में करेगी।
जैन ने कहा कि 31 दिसंबर 2008 तक कंपनी पर 1,825 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिस पर औसत ब्याज दर 13.59 फीसदी थी। जैन ने कहा कि कंपनी का ध्यान मौजूदा परियोजनाओं पर है और परियोजना स्थल के पास की जमीन खरीदने के अलावा किसी नई परियोजनाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी परियोजना-दर-परियोजना निजी इक्विटी के जरिए धन जुटा सकती है। कंपनी की खुदरा योजना के संबंध में पूछने पर जैन ने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में हमने अपनी खुदरा विस्तार की योजना को फिलहाल रोक दिया है।
उल्लेखनीय है कि बिक्री में कमी और उच्च ब्याज दरों के कारण दिसंबर 2008 को समाप्त तीसरी तिमाही के दौरान पार्श्वनाथ का शुध्द मुनाफा गिरकर 5.42 करोड़ रुपये रह गया।
बकाया भुगतान के लिए पार्श्वनाथ ने मांगा 9 से 12 माह का समय
कंपनी मौजूदा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की कर रही है कोशिश
डीएलएफ जुटाएगी 25 अरब रुपये !
भारत की शीर्षस्थ रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड को उम्मीद है कि मार्च 2009 की तिमाही तक प्रॉपर्टी ट्रस्ट में इक्विटी निवेश के जरिये 20 से 25 अरब रुपये की उगाही हो सकती है।
कंपनी के उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने कहा कि अगले तीन महीने में प्रॉपर्टी की कीमतें 15 फीसदी तक कम हो सकती है। मालूम हो कि कंपनी को दिसंबर में समाप्त हुई तिमाही में शुद्ध मुनाफे में 69 फीसदी की कमी देखनी पड़ी,जबकि कंपनी की आय में समीक्षाधीन तिमाही में 59 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।