हर नये दिन के साथ मुश्किलों में फंसी रिटेल कंपनी की मुश्किल और बढ़ जाती है। फिलहाल यह काम किसी बाहरी ने नहीं बल्कि कंपनी में ही हिस्सेदार आईसीआईसीआई वेंचर ने किया है।
आईसीआईसीआई वेंचर ने चेन्नई में कंपनी पंजीयक (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, आरओसी) को एक पत्र लिखा है जिसमें इस खस्ताहाल कंपनी के खातों की जांच के लिए एक स्वतंत्र ऑडिटर की नियुक्ति की बात की है।
सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आईसीआईसीआई वेंचर ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि सुभिक्षा के प्रमुख आर सुब्रमण्यन ने पिछले पंद्रह महीनों में कंपनी के बहीखातों को उनके या बोर्ड के सामने पेश नहीं किया है। निवेशकों ने कंपनी की खस्ता हालत और वित्तीय स्थिति को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।
आईसीआईसीआई वेंचर ने सुभिक्षा के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यन के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें सुब्रमण्यन ने कहा था कि यह प्राइवेट इक्विटी कंपनी निदेशकों के सहारे कंपनी के प्रबंधन पर हावी हो सकती है।
सुभिक्षा में सुब्रमण्यन ही सबसे बड़े हिस्सेदार हैं जिनकी इस कंपनी में 59 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, आईसीआईसीआई वेंचर 23 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ इस कंपनी में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदार है।
पिछले हफ्ते आईसीआईसीआई वेंचर का प्रतिनिधित्व करने वाले चार निदेशकों ने सुभिक्षा के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इन निदेशकों में रेनुका रामनाथ, राजीव बख्शी, रमा बीजापुरकर और के अन्नन श्रीनिवासन शामिल थे।
इस मामले पर कंपनी के प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यन का कहना है, ‘हमें नहीं मालूम कि किसने कंपनी पंजीयक को कोई पत्र लिखा है या नहीं लिखा है। हम सही तरीके से अपना कारोबार चला रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी में निवेश करने करने के चलते आईसीआईसीआई वेंचर के पास भी कुछ अधिकार हैं।
उन्होंने कहा कि जहां तक आईसीआईसीआई वेंचर द्वारा इस मामले में सवाल उठाने की बात है तो कंपनी उन्हीं मानदंडों पर चल रही है जिस पर आईसीआईसीआई वेंचर के साथ सहमति बनी थी।
आईसीआईसीआई वेंचर ने पिछले साल सितंबर में इस कंपनी में अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी को तकरीबन 230 करोड़ रुपये में अजीम प्रेमजी की निवेश कंपनी जैश इन्वेस्टमेंट को बेच दिया था। इसके बाद भी आईसीआईसीआई वेंचर की इसमें 23 फीसदी हिस्सेदारी बचती है।