ओवीएल ने ईरान से फरजाद में मांगा 30 फीसदी हिस्सा

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 3:40 AM IST

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी की विदेश में काम करने वाली इकाई ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) ने ईरान के फरजाद बी गैस खोज क्षेत्र में कम से कम 30 फीसदी अधिकार का दावा किया है। कंपनी ने ईरान के प्राधिकरण को पत्र लिखकर क्षेत्र के विकास के तकनीकी प्रस्ताव एवं अनुबंध के नियम और शर्तें साझा करने के लिए कहा है ताकि भारतीय कंसॉर्शियम उसका मूल्यांकन कर सके और भविष्य में परियोजना में भागीदारी का निर्णय कर सके।
पार्स ऑयल ऐंड गैस कंपनी और पेट्रोपार्स कंपनी ने 16 मई को फरजाद बी क्षेत्र के विकास के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इस परियोजना की लागत करीब 1.78 अरब डॉलर है और पांच साल में यहां से 2.8 करोड़ घन मीटर गैस का रोजाना उत्पादन किया जाना है। समझौते पर हस्ताक्षर के समय ईरान के तेल मंत्री बिजान जांगनेह ने कहा था कि भारतीय इस परियोजना के इलाके में आने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने उनके साथ दो बार बातचीत की और यहां तक राजी हुए कि उन्हें तरलीकृत प्राकृतिक गैस विकसित नहीं करनी है लेकिन पाबंदियों के कारण उन्होंने इस क्षेत्र को विकसित करने से इनकार कर दिया।’
उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार पाबंदियों के दौरान घरेलू कंपनियों को मजबूती प्रदान करने पर ध्यान दे रही है। क्षेत्र के विकास और लागत कम करने के लिए विभिन्न परिदृश्यों पर विचार किया गया। इस परियोजना का क्रियान्वयन दक्षिण पार्स की तुलना में कठिन है और निवेश भी करीब दोगुना होगा। 2002 में भारत ने फारसी ब्लॉक का उत्खनन सेवा अनुबंध हासिल किया था। इसके तहत ओवीएल और इंडियन ऑयल की इसमें 40-40 फीसदी हिस्सेदारी थी एवं 20 फीसदी हिस्सेदारी ऑयल इंडिया के पास थी।
भारतीय कंसॉर्शियम के अनुसार उसके पास फरजाद बी के विकास अनुबंध में भागीदारी करने का विकल्प है और इसमें कम से कम 30 फीसदी भागीदारी होनी चाहिए। ओवीएल के पत्र का ईरान की सरकार ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है। उत्खनन गतिविधियों और भूगर्भिक अध्ययन के बाद इस क्षेत्र में 22 लाख करोड़ घन फुट गैस होने का अनुमान है। फरजाद बी ब्लॉक में 2006-07 में  उत्खनन के लिए कुएं खोदे गए थे, जिनमें काफी मात्रा में गैस पाई गई थी।

First Published : June 15, 2021 | 11:24 PM IST