तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) को आयकर विभाग के कर जमा करने के आदेश के विरुद्ध अपील दायर करने की अनुमति सरकार ने दे दी है।
तेल के हर कुएं को एक अलग कंपनी मानने का तर्क रखते हुए देश की इस सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी का कहना है कि उसे कर में लंबी अवधि की छूट मिलनी चाहिए।
अभी पिछले हफ्ते ही केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली विवादास्पद मुद्दों की समिति (कमिटी ऑन डिस्प्यूट्स) ने इस तरह के एक अन्य मामले में आयकर विभाग को अनुमति दी कि वह देश की दूसरी बड़ी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने ले जाए।
मालूम हो कि न्यायाधिकरण के फैसले को केवल उच्च न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकती है। हालांकि यह दोनों मामलों में एक जैसा ही रहा है।
वित्त वर्ष 2002-03 और 2003-04 के लिए ओएनजीसी ने आयकर अधिनियम की धारा 80-आईबी के तहत तेल उत्पादन के नए उपक्रमों पर आयकर छूट का दावा किया था। विभाग ने छूट देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि कंपनी के हरेक कुएं को अलग उपक्रम नहीं माना जा सकता।
इस तरह ओएनजीसी से 1,200 करोड़ रुपये अतिरिक्त मांगे गए। कंपनी आयकर विभाग के इस फैसले के खिलाफ आयकर आयुक्त (अपीलीय) के पास गई। यहां जीत आयकर विभाग की हुई। चूंकि ओएनजीसी एक सरकारी उपक्रम है, इसलिए इस मामले में आगे अपील करने के लिए उसे सीओडी से अनुमति लेनी थी।