गुजरात में 50 मेगावाट की पहली पवन ऊर्जा फार्म स्थापित करने के बाद अब ओएनजीसी वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र की अपार संभावनाओं का फायदा उठाने की योजना बना रही है।
इसके लिए कंपनी कर्नाटक परियोजना को टालने की योजना भी बना रही है। ओएनजीसी के सीएमडी आर. एस. शर्मा ने बिानेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम पवन ऊर्जा की ऑफशोर (अपतटीय) क्षमता पर दस्तक देने की योजना बना रहे हैं।’
शर्मा ने कहा कि इस बाबत ओएनजीसी कई बैठकें कर रही है और अक्षय ऊर्जा की ऑफशोर क्षमता को लेकर आंकड़े एकत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि बाजार में जो पवन ऊर्जा के लिए सबसे बड़ी मशीन है, उसकी क्षमता 5 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की है।
शर्मा ने भरोसा दिलाया कि पवन ऊर्जा परियोजनाओं को अमली जामा पहनाने के रास्ते में फंड आड़े नहीं आएगा। सूत्रों ने बताया कि ऑफशोर परियोजना के अंतिम मॉडल को तैयार करने में ओएनजीसी के कॉर्पोरेट सेल के अधिकारी मुख्यालय में तेजी से काम कर रहे हैं। चूंकि भारत का तटीय क्षेत्र काफी विशाल है, इसलिए यहां पवन ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
सूत्रों ने बताया कि ऑफशोर परियोजना व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। हालांकि ओएनजीसी ने गुजरात की 50 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना के बदले प्रस्तावित कर्नाटक की पवन ऊर्जा परियोजना को स्थगित करने का फैसला लिया है।