कॉर्पोरेट गवर्नेंस को समृद्ध करने के लिए नए कंपनी बिल 2008 में कंपनियों के लिए यह आवश्यक कर दिया गया है कि वे इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) द्वारा जारी पहले दो सचिव स्तरीय मानक का पालन करें।
हाल ही में इंस्टीटयूट ने दसवां सचिव मानक जारी किया है और सरकार से यह आग्रह किया है वे इस तरह का निर्देश जारी करे, ताकि कंपनियां इन सारे मानकों को अपनाए। आईसीएसआई के सचिव और प्रमुख कार्यकारी अधिकारी एन. के. जैन ने कहा, ‘अच्छी तरह से शासित कंपनियां इन मानकों का अपने स्तर पर पालन करती है। इन मानकों के पालन करने का उद्देश्य बेहतर शासन तंत्र विकसित करना होता है।’
उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि कंपनियां आने वाले समय में दूसरे मानकों को भी तरजीह देंगी।’ साचिविक मानक के तहत बोर्ड बैठक और शेयरधारकों के साथ बैठक आदि मसलों के तौर तरीके के बारे में बात की जाती है। इस मानक के तहत खाता और रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने के तौर तरीके पर भी प्रकाश डाला जाता है।
लेकिन जिस तरह इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के एकाउंटिंग मानक कंपनियों के लिए बाध्यकारी होते हैं, उस तरह साचिविक मानकों का पालन करना उनके लिए आवश्यक नहीं होता है। यह कंपनियों पर निर्भर करता है कि साचिविक मानक का कौन सा हिस्सा वे पालन करते हैं।
सदन में पड़ी नई कंपनी बिल कहता है, ‘ आम और बोर्ड बैठक के मद्देनजर हर कंपनियों को साचिविक मानकों पर गौर करना चाहिए।’ इस संदर्भ में कंपनी बिल 2008 के उपबंध 107 (10) में चर्चा की गई है। साचिविक मानक 1 और 2 आम और बोर्ड बैठक के तौर तरीकों की बात करता है।
बोर्ड बैठक कितने दिनों में होनी चाहिए या यह बैठक कितनी देर चलनी चाहिए, इसे लेकर अभी कोई ठोस नियम नहीं है। अगर ये मानक मान लिए जाते हैं, तो सभी जगह एक समान बैठक परंपरा का चलन शुरू हो जाएगी।
बोर्ड रिपोर्ट के 10 सचिव स्तर के मानक : बोर्ड किस तरह अपनी रिपोर्ट पेश करें, इस पर दसवीं सचिव मानक (एसएस 10) लाई गई है। इसके अंतर्गत किसी बड़े वित्तीय परिवर्तन और जिम्मेदार उद्धोषणा के बारे में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। बोर्ड रिपोर्ट में उल्लिखित कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन स्कीम (ईएसओएस) का पूरा विवरण भी इस मानक के तहत वांछित होता है।