facebookmetapixel
Advertisement
4000 लोगों की जा सकती है नौकरी! JLR बड़ी छंटनी की तैयारी में, बढ़ते खर्च से कंपनी परेशानसुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें: CBI ने दर्ज की FIR, फर्जी कागज दिखाकर ₹1,322 करोड़ के फ्रॉड का आरोपएक शेयर पर ₹60 का मोटा डिविडेंड! पावर ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सNPS में ‘नो मिनिमम इन्वेस्टमेंट’ का क्या है सच? एक्सपर्ट से समझें, किसे मिलेगा फायदा और किसे नहींटाटा मोटर्स खरीदेगी इटली की मशहूर इवेको ग्रुप, €3.82 अरब की डील से ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा दबदबामोटी कमाई का चांस! अगले हफ्ते लगभग 150 कंपनियां देंगी डिविडेंड, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकाजन्माष्टमी पर बाजारों में बंपर खरीदारी की उम्मीद, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के व्यापार का अनुमान18 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 37.5 अरब डॉलर खर्च, फिर भी ट्रंप ने ईरान युद्ध को बताया ‘छोटी बात’लाइट, कैमरा और एक्शन: कैसे साल 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय सिनेमा का पूरा कारोबार बदल दिया?भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों और शहरों को खुद जुटाना होगा फंड: भार्गव दासगुप्ता

NCLT ने सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने वाले आदेश पर लगाई रोक

Advertisement

पीठ ने कार्यवाही चलते रहने के दौरान चंद्रा को अपनी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से हस्तांतरित करने, निपटाने या अन्यथा अलग करने से भी रोक दिया

Last Updated- September 01, 2026 | 10:01 PM IST
Subhash Chandra
ZEE समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा । फाइल फोटो

राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) के पांच-सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही में प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने वाले 25 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी।

एनसीएलटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाले बड़े पीठ ने पाया कि पिछली कार्यवाही से कोई निश्चित बहुमत वाला फैसला सामने नहीं आ सका था। इसलिए, उसने मामले पर फिर से विचार करने का फैसला किया और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए।

पीठ ने कार्यवाही चलते रहने के दौरान चंद्रा को अपनी संपत्ति को सीधे या परोक्ष रूप से हस्तांतरित करने, निपटाने या अन्यथा अलग करने से भी रोक दिया।  इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 95 के तहत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की थी।

चंद्रा की प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना में 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत ऋणदाता दावों के मुकाबले 6.25 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी जिसमें दिवालियापन प्रक्रिया लागत के लिए 25 लाख रुपये अतिरिक्त रखे गए थे।  इस योजना पर पहले एनसीएलटी के भीतर ही आपस में विरोधी विचार सामने आए थे।

न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने उन ऋणदाताओं की स्वीकृति का समर्थन किया था जिन्होंने इसके पक्ष में मतदान किया था, साथ ही यह भी प्रस्ताव दिया था कि असहमति वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास वसूली के लिए अन्य कानूनी रास्ते अपनाने का अधिकार है। लेकिन तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी ने दिवाला समाधान पेशेवर द्वारा प्रक्रिया को संचालित करने के तरीके में महत्त्वपूर्ण कमियों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था।

इस विभाजित फैसले के कारण कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा को मामला सौंपा गया। अधिनियम यह नियंत्रित करता है कि एनसीएलटी पीठ के सदस्यों के बीच राय के अंतर को कैसे हल किया जाए।

अपने 25 अगस्त के फैसले में शर्मा ने पुनर्भुगतान प्रस्ताव को मंजूरी दी, लेकिन अनिल कुमार द्वारा 960 व्यक्तियों की ओर से और सुनील जैन द्वारा अन्य 300 व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले दावों को बाहर कर दिया।

Advertisement
First Published - September 1, 2026 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement