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आईपीओ की कतार में 10 से अधिक स्टार्टअप

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Last Updated- December 12, 2022 | 8:17 AM IST

भारत की दस से अधिक स्टार्टअप अगले 36 महीने में आईपीओ लाने की तैयारी कर रही हैं। इन कंपनियों का मूल्यांकन करीब 84 अरब डॉलर है। मर्चेंट बैंकरों का कहना है कि कंपनियों ने अभी आईपीओ के आकार पर निर्णय नहीं किया है लेकिन अनुमान के मुताबिक शुरुआती चरण में कंपनियां न्यूनतम 8 से 10 अरब डॉलर जुटा सकती हैं। लेकिन कंपनियों का मूल्यांकन बढऩे पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
मर्चेंट बैंकरों और विभिन्न घोषणाओं के अनुसार आईपीओ लाने की तैयारी कर रही कंपनियों में बैजूज, पेटीएम, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, इनमोबि, नायिका, डेल्हीवरी, ग्रोफर्स, पॉलिसीबाजार और उड़ान प्रमुख हैं।
आईपीओ लाने की तैयारी कर रहे दस प्रमुख स्टार्टअप ने 19.2 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई है जिसका मतलब है कि उनका मूल्यांकन पहले ही चार गुना बढ़ गया है। कार्स24 भी आईपीओ लाने की योजना बना सकती है। आईपीओ नियम के तहत 1,600 करोड़ रुपये से कम की बाजार पूंजी वाली कंपनियों को 25 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश करनी होगी। इससे अधिक पूंजी वाली फर्में न्यूनतम 10 फीसदी की पेशकश कर सकती हैं, जिसे तीन साल में बढ़ाकर 25 फीसदी करना होगा।         
शेयर बाजार में तेजी और बर्गर किंग इंडिया और एयरबीएनबी के आईपीओ को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया से अन्य कंपनियों का भी मनोबल बढ़ा है। इसके साथ ही कई स्टार्टअप फर्में मुनाफे में आ गई हैं या अपना घाटा कम किया है।11.1 अरब डॉलर मूल्यांकन वाली बैजूज के संस्थापक बैजू रविंद्रन ने कहा कि वह भारत और अमेरिका दोनों जगह अपनी कंपनी को सूचीबद्घ कराने की संभावना तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम 24 से 36 महीने में आईपीओ ला सकते हैं। हमारा भारतीय परिचालन पहले ही मुनाफे में आ चुका है और अंतरराष्ट्रीय कारोबार अभी निवेश के चरण है जो अगले दो साल में मुनाफे में आ जाएगा।’
कंपनी आईपीओ के जरिये 1.5 अरब डॉलर जुटा सकती है। आईपीओ से मिले पैसे का उपयोग कंपनी विशेष तौर पर वैश्विक बाजार में अधिग्रहण और कारोबार के विस्तार पर करेगी।देश की पहली यूनिकॉर्न इनमोबि के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी नवीन तिवारी ने कहा कि उनकी योजना 6 से 18 महीने में आईपीओ लाने की है। उन्होंने कहा, ‘हम 2016 से ही मुनाफा कमा रहे हैं और पिछले दो साल में हमारा मुनाफा काफी बढ़ा है। आईपीओ से मिलने वाले पैसे से वैश्विक अधिग्रहण करने की योजना है।’
मर्चेंट बैंकर के आकलन के अनुसार इनमोबि का मूल्यांकन करीब 12 से 14 अरब डॉलर हो सकता है। इसका मौजूदा मूल्यांकन 2011 में सॉफ्टबैंक से 20 करोड़ डॉलर जुटाने पर आधारित है। उसके बाद से कंपनी ने कोई पूंजी नहीं जुटाई है। नायिका भी मुनाफा कमाने की दिशा में बढ़ रही है। नायिका के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी फाल्गुनी नायर ने कहा कि साल-दर-साल कंपनी का राजस्व बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2020 में कंपनी की आय 1,860 करोड़ रुपये रही और एबिटा 94 करोड़ रुपये रहा।’ गोल्डमैन सैक्स के साथ चर्चा में नायिका ने कहा था कि उसके ऑनलाइन सौंदर्य कारोबार का एबिटा वित्त वर्ष 2019 से ही सकारात्मक रहा है और वित्त वर्ष 2020 में यह मुनाफे में आ गया। अब वित्त वर्ष 2022 तक फैशन कारोबार का एबिटा सकारात्मक करने का लक्ष्य है।
इक्विरस कैपिटल के संस्थापक अजय गर्ग ने कहा, ‘मुनाफा नहीं कमाने वाली कंपनियों के निर्गम का 75 फीसदी क्यूआईपी द्वारा, 10 फीसदी एचएनआई और बाकी खुदरा निवेशकों द्वारा लिया जा सकता है। मुनाफे वाली कंपनियों के निर्गम का 50 फीसदी क्यूआईपी, 15 फीसदी एचएनआई और बाकी खुदरा निवेशक ले सकते हैं।’
कई स्टार्टअप की होल्डिंग कंपनियां भी हैं जो अमेरिका में सूचीबद्घ करा सकती हैं। गर्ग ने कहा कि बाजार में तरलता होने से मुनाफे को लेकर कोई बंदिश नहीं है। इसके अलावा वे सीधे तौर पर सूचीबद्घ हो सकती हैं या विशेष उद्देश्यीय अधिग्रहण कंपनी के जरिये सूचीबद्घ करा सकती हैं।
ग्रोफर्स जैसी कई कंपनियां अप्रत्यक्ष तरीके से सूचीबद्घ हो सकती हैं। हालांकि भारत में गठित स्टार्टअप के पास यह विकल्प नहीं है।भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इन्हें विदेश में सीधे सूचीबद्घ होने की अनुमति दी है लेकिन उन्हें भारत में भी सूचीबद्घ होना होगा। कई स्टार्टअप ने दोहरी सूचीबद्घता के प्रस्ताव का विरोध किया है।
तकनीकी कंपनियों को सूचीबद्घ होने में मदद के लिए सेबी ने इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म स्थापित किया है, जिसे नियम उदार रखे गए हैं। लेकिन संस्थागत और मान्यताप्राप्त निवेशक ही इस प्लेटफॉर्म पर खरीद-बिक्र्री कर सकते हैं।
मेगाडेल्टा कैपिटल के संस्थापक पार्टलर बाला देशपांडे ने कहा कि गैर-मुनाफे वाली कंपनियों को सूचीबद्घ कराने के लिए निर्गम का 75 फीसदी क्यूआईपी को देना अच्छा विकल्प है। कविशेषज्ञ निवेशकों को स्टार्टअप आईपीओ की होड़ से सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

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First Published - February 14, 2021 | 11:06 PM IST

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