एयर इंडिया ने अपना ध्यान यूरोप, उत्तर अमेरिका और दक्षिण एशिया पर केंद्रित कर लिया है और वहां कई शहरों के लिए उड़ानें बढ़ा रही है। इसकी वजह इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक हवाई सेवाओं पर लगा प्रतिबंध है।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने रविवार को घोषणा की कि वह 10 से 18 मार्च के बीच न्यूयॉर्क (जेएफके), लंदन हीथ्रो, फ्रैंकफर्ट, पैरिस, एम्स्टर्डम और ज्यूरिख सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के लिए 78 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करेगी। साथ ही माले और कोलंबो के लिए भी सेवाएं शुरू करेगी। एयरलाइन ने कहा कि इन अतिरिक्त सेवाओं से दोनों दिशाओं में नौ मार्गों पर 17,660 सीटें जुड़ जाएंगी।
एयर इंडिया ने कहा कि ये अतिरिक्त उड़ानें उन यात्रियों की मदद के लिए हैं, जिनके पास सीमित विकल्प हैं क्योंकि पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई क्षेत्र पर पाबंदी के कारण कई एयरलाइनों को अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं या उनका मार्ग बदलना पड़ा है। एयर इंडिया की यूरोपीय सेवाएं बोइंग 787-8 विमानों से संचालित की जाएंगी जबकि न्यूयॉर्क की उड़ानें नियामकीय मंजूरी के बाद बोइंग 777-300ईआर विमानों से संचालित की जाएंगी।
एयरलाइन के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी निपुण अग्रवाल ने कहा, मुश्किल हालात के बावजूद एयर इंडिया यूरोप और उत्तर अमेरिका के लिए अपनी निर्धारित सेवाएं जारी रखे हुए है और संचालन के लिए सुरक्षित माने जाने वाले वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करके कई अंतरराष्ट्रीय गेटवे से कनेक्टिविटी बनाए रख रही है।
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने भी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बहाल की हैं। रविवार को एक्स पर जारी एक यात्रा सलाह में एयरलाइन ने कहा, उसने यूरोप के लिए उड़ानें फिर से शुरू कर दी हैं और पश्चिम एशिया के आठ गंतव्यों के लिए उड़ानें जारी रखेगी। उसने यह भी चेतावनी दी कि हालात में बदलाव के साथ समयसारणी में भी अचानक परिवर्तन हो सकता है।
हालांकि, उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र से बचने के लिए विमानन कंपनियों को काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इंडिगो ने रविवार को मुंबई-लंदन उड़ान फिर से शुरू की, जिसके लिए उसने यूरोपीय कंपनी नॉर्स अटलांटिक एयरवेज से लीज पर लिए गए बोइंग 787-9 विमान का इस्तेमाल किया। यह उड़ान मुंबई से अफ्रीका के ऊपर से होते हुए दक्षिण की ओर गई और फिर लाल सागर पार करके मिस्र में प्रवेश किया। इससे उड़ान की अवधि लगभग 10 घंटे 30 मिनट बढ़ गई। उड़ान में इस्तेमाल विमान यूरोप में पंजीकृत है। इसलिए यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) के दिशानिर्देशों के दायरे में आता है, जिसने एयरलाइंस को पश्चिम एशियाई हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि भारतीय एयरलाइंस छोटे पाकिस्तान-अफगानिस्तान कॉरिडोर का उपयोग नहीं कर सकती हैं क्योंकि पाकिस्तान ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से रोक रखा है, जिससे उनके पास सीमित विकल्प हैं।
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले किए जिसका ईरान ने जवाब दिया। लिहाजा, वाणिज्यिक हवाई यातायात पर व्यापक प्रतिबंध लग गए। खाड़ी के कई देशों ने तब से अपने हवाई क्षेत्र के कुछ हिस्सों को बंद या प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे एयरलाइनों को यूरोप और उत्तर अमेरिका के लिए उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या दक्षिणी सऊदी अरब जैसे वैकल्पिक मार्गों से सेवाएं चलानी पड़ीं।