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मेहली मिस्त्री होंगे टाटा ट्रस्ट्स से बाहर, तीन ट्रस्टी ने दोबारा नियुक्ति के खिलाफ डाला वोट

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मेहली मिस्त्री 2022 में टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े थे और वे स्वर्गीय रतन टाटा के करीबी माने जाते थे। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स में ट्रस्ट्स की 51% हिस्सेदारी है

Last Updated- October 28, 2025 | 10:25 PM IST
Tata Group
Representational Image

टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। 65 वर्षीय मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) अब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि छह में से तीन ट्रस्टी ने उनकी दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata), टीवीएस ग्रुप के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan) और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह (Vijay Singh) ने मिस्त्री के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव (reappointment resolution) का विरोध किया। यह वोटिंग पिछले हफ्ते सर्कुलर रेजॉल्यूशन के जरिए कराई गई थी।

रतन टाटा के करीबी सहयोगी रहे हैं मेहली मिस्त्री

मेहली मिस्त्री 2022 में टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े थे और वे स्वर्गीय रतन टाटा के करीबी माने जाते थे। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स (Tata Sons) में इन दोनों कोर ट्रस्ट्स की 51% हिस्सेदारी है। साथ ही इन्हें वीटो पावर और टाटा सन्स बोर्ड में एक-तिहाई डायरेक्टर नॉमिनेट करने का अधिकार है।

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्टियों के बीच मतभेद उस समय और गहरा गया जब मिस्त्री गुट ने विजय सिंह को टाटा सन्स के नामित निदेशक के रूप में फिर से नियुक्त करने के प्रस्ताव का विरोध किया। इस कदम से ट्रस्ट बोर्ड दो खेमों में बंट गया।

SP ग्रुप से संबंध लेकिन दूरी बरकरार

मेहली मिस्त्री का संबंध शापूरजी पालोनजी (SP) परिवार से है, जो 2016 में सायरस मिस्त्री की टाटा सन्स से बर्खास्तगी के बाद से टाटा समूह के साथ लंबे समय से कॉर्पोरेट विवाद में उलझा हुआ है। हालांकि रिश्तेदारी के बावजूद, मेहली मिस्त्री और SP ग्रुप के बीच संबंध बेहद औपचारिक और दूरस्थ माने जाते हैं।

‘लाइफ ट्रस्टीशिप’ को लेकर ट्रस्टियों में मतभेद

दिलचस्प बात यह है कि वेणु श्रीनिवासन को सर्वसम्मति से फिर से ट्रस्टी नियुक्त किया गया, और इस प्रस्ताव का समर्थन खुद मेहली मिस्त्री ने भी किया था। हालांकि, उन्होंने यह शर्त रखी कि सभी ट्रस्टियों के लिए पुनर्नियुक्ति समान रूप से लागू होनी चाहिए।

मिस्त्री गुट का मानना है कि एक बार ट्रस्टी को दोबारा नियुक्त किया जाए, तो वह “आजीवन ट्रस्टी (life trustee)” बन जाता है। लेकिन नोएल टाटा के नेतृत्व वाला गुट इस बात से असहमत है।

रतन टाटा के निधन के बाद, ट्रस्ट्स ने एक प्रस्ताव पारित किया था कि “हर ट्रस्टी पुनर्नियुक्ति के बाद आजीवन ट्रस्टी बन जाएगा।” हालांकि, अब ट्रस्ट के कानूनी सलाहकारों में इस बात को लेकर मतभेद है कि क्या यह प्रावधान वास्तव में आजीवन सदस्यता का अधिकार देता है या नहीं।

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First Published - October 28, 2025 | 12:07 PM IST

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