उपभोक्ता वस्तु अनाने वाली प्रमुख कंपनी मैरिको ने आज देश के 4,000 करोड़ रुपये के इंस्टेंट नूडल्स बाजार में उतरने की घोषणा की। कंपनी ने अपने सफोला ब्रांड के तहत उत्पादों की एक नई लाइन शुरू की है। मैगी विवाद के बाद छह साल में यह किसी उपभोक्ता वस्तु कंपनी द्वारा उठाया गया पहला महत्त्वपूर्ण कदम है।
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि यह एक उल्लेखनीय पहल है क्योंकि यह मैरिको की समग्र रणनीति में फूड श्रेणी के बढ़ते महत्त्व को दर्शाती है। शहद श्रेणी में कंपनी के उतरने के करीब छह महीने बाद यह पहल की गई है। करीब 1,500 करोड़ रुपये की इस श्रेणी में डाबर जैसी प्रमुख कंपनियों का वर्चस्व है।
भारत के इंस्टेंट नूडल्स बाजार में नेस्ले की मैगी की अनुमानित बाजार हिस्सेदारी 60 फीसदी है जबकि आईटीसी के सनफीस्ट यिप्पी नूडल्स की 22 फीसदी की बाजार हिस्सेदारी है। उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि सीजी फूड्स की वाई वाई नूडल्स की बाजार हिस्सेदारी लगभग 9 फीसदी है।
मैरिको के एमडी एवं सीईओ सौगत गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा था कि लोग भरोसेमंद ब्रांडों को पसंद कर रहे हैं जो सफोला और उसके विस्तार को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा, ‘सफोला पोर्टफोलियो के तहत खाद्य तेल का उपभोक्ताओं के बीच एक मजबूत आधार है। शहद और च्यवनप्राश जैसे नए क्षेत्र भी शुरू हो रहे हैं। शहद श्रेणी में हमारा उद्देश्य एक ऐसा उत्पाद पेश करना था जो शुद्धता के मामले में बेहतर है। हमें विश्वास है कि हम कहीं अधिक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में समर्थ होंगे। शहद श्रेणी को अगले साल तक 100 करोड़ रुपये का रन-रेट होना चाहिए।’ विश्लेषकों का कहना है कि सफोला ब्रांड के तहत फूड कारोबार 2021-23 तक करीब 450 से 500 करोड़ रुपये का हो जाना चाहिए।