तीन साल से चल रही एमटेक ऑटो की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में और देर हो सकती है और इसकी वजह है बंधक रखी गई एक परिसंपत्ति। समाधान आवेदक डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया है, जो उसकी योजना मंजूरी करने वाले एनसीएलटी के खिलाफ गुरुवार से सुनवाई शुरू कर सकता है। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने पिछले महीने ट्रिब्यूनल का रुख किया था।
इस समस्या की जड़ में है एसीई कॉम्पलेक्स लैंड के लिए लंबी अवधि का पट्टा। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स की समाधान योजना के तहत एमटेक ऑटो के हक में कॉम्पलेक्स के लंबी अवधि के पट्टे का क्रियान्वयन कारोबार जारी रखने और कंपनी की रफ्तार के लिए अहम शर्त है और इस शर्त के पूरा न होने पर समाधान योजना खत्म हो जाएगी।यह मसला एनसीएलटी में सुनवाई के दौरान उठा था। केकेआर इंडिया फाइनैंशियल सर्विसेज और एलऐंडटी फाइनैंस लिमिटेड के सिक्योरिटी ट्रस्टी के तौर पर विसस्ट्रा आईटीसीएल (इंडिया) ने एसीई कॉम्पलेक्स की जमीन पर मॉर्गेज अधिकार को लेकर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल और लेनदारों की समिति के खिलाफ एनसीएलटी में याचिका दाखिल की थी। उसने मांग की थी कि इस जमीन को कॉरपोरेट देनदार के सीआईआरपी और किसी समाधान योजना से बाहर रखा जाने का आदेश दिया जाए।
हालांकि इस जमीन की मालिक गेटवे इंपेक्स ने जनवरी में पट्टा करार किया है। एनसीएलटी के आदेश में इस पट्टा करार की वैधता पर ध्यान नहीं दिया गया। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स की योजना को जुलाई में एनसीएलटी से मंजूरी मिली। जून में एनसीएलटी के पास अंतिम मंजूरी के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने आवेदन किया था। मध्य जून में डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से कहा कि वह अन्य चीजों मसलन शर्तों की स्थिति आदि पर चर्चा करे। कुछ दिन बाद डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने सर्वोच्च न्यायालय मेंं याचिका दाखिल कर सीओसी के साथ शर्तों पर चर्चा और कोविड-19 के असर के आकलन के लिए समयसीमा में बढ़ोतरी की मांग की थी।