facebookmetapixel
Advertisement
‘उदारीकण के बाद अहसास हुआ कि हमें इनोवेशन करना होगा, न कि दिल्ली में इंतजार’, नारायण मूर्ति ने बयां की 1991 से पहले की दुश्वारियां1991 से अब तक का सफर: अविश्वास से निकलकर भरोसे पर आधारित आर्थिक नीति बनाने की जरूरत‘बंगाल को मिली तबाही और निराशा की विरासत’, बोले स्वप्न दासगुप्ता: निवेश लाने के लिए करेंगे अतिरिक्त प्रयासऑरिफ्लेम बेचेगी भारत में अपना विनिर्माण कारोबार, अकुम्स ड्रग्स की सहायक कंपनी प्योर एंड क्योर से हुआ समझौता₹9,200 करोड़ के IPO से कर्जमुक्त होगी मणिपाल हेल्थ, उत्तर भारत में विस्तार पर कंपनी का जोर: दिलीप जोसजून में लगातार दूसरे महीने क्रेडिट कार्ड खर्च ₹2 लाख करोड़ पार, HDFC Bank और SBI का दिखा दबदबाICICI Bank ने डॉलर बॉन्ड से जुटाए $1 अरब, 2017 के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक बॉन्ड इश्यूओडिशा में बनेगा देश का पहला AI-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर, HCLTech करेगी ₹14,257 करोड़ का निवेशबंगाल को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, केंद्र के साथ तालमेल और निवेश पर रहेगा हमारा जोर: स्वप्न दासगुप्ताजून में सुस्त IPO के बावजूद ऋण प्रतिभूतियों ने रचा इतिहास, जुटाई ₹3.15 लाख करोड़ की रिकॉर्ड रकम

एमटेक ऑटो के समाधान का लंबा इंतजार

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 2:56 AM IST

तीन साल से चल रही एमटेक ऑटो की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया में और देर हो सकती है और इसकी वजह है बंधक रखी गई एक परिसंपत्ति। समाधान आवेदक डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया है, जो उसकी योजना मंजूरी करने वाले एनसीएलटी के खिलाफ गुरुवार से सुनवाई शुरू कर सकता है। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने पिछले महीने ट्रिब्यूनल का रुख किया था।
इस समस्या की जड़ में है एसीई कॉम्पलेक्स लैंड के लिए लंबी अवधि का पट्टा। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स की समाधान योजना के तहत एमटेक ऑटो के हक में कॉम्पलेक्स के लंबी अवधि के पट्टे का क्रियान्वयन कारोबार जारी रखने और कंपनी की रफ्तार के लिए अहम शर्त है और इस शर्त के पूरा न होने पर समाधान योजना खत्म हो जाएगी।यह मसला एनसीएलटी में सुनवाई के दौरान उठा था। केकेआर इंडिया फाइनैंशियल सर्विसेज और एलऐंडटी फाइनैंस लिमिटेड के सिक्योरिटी ट्रस्टी के तौर पर विसस्ट्रा आईटीसीएल (इंडिया) ने एसीई कॉम्पलेक्स की जमीन पर मॉर्गेज अधिकार को लेकर रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल और लेनदारों की समिति के खिलाफ एनसीएलटी में याचिका दाखिल की थी। उसने मांग की थी कि इस जमीन को कॉरपोरेट देनदार के सीआईआरपी और किसी समाधान योजना से बाहर रखा जाने का आदेश दिया जाए।
हालांकि इस जमीन की मालिक गेटवे इंपेक्स ने जनवरी में पट्टा करार किया है। एनसीएलटी के आदेश में इस पट्टा करार की वैधता पर ध्यान नहीं दिया गया। डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स की योजना को जुलाई में एनसीएलटी से मंजूरी मिली। जून में एनसीएलटी के पास अंतिम मंजूरी के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने आवेदन किया था। मध्य जून में डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से कहा कि वह अन्य चीजों मसलन शर्तों की स्थिति आदि पर चर्चा करे। कुछ दिन बाद डेक्कन वैल्यू इन्वेस्टर्स ने सर्वोच्च न्यायालय मेंं याचिका दाखिल कर सीओसी के साथ शर्तों पर चर्चा और कोविड-19 के असर के आकलन के लिए समयसीमा में बढ़ोतरी की मांग की थी।

Advertisement
First Published - August 26, 2020 | 11:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement