कलकत्ता उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने बिड़ला कॉरपोरेशन लिमिटेड, यूनिवर्सल केबल्स, विंध्य टेलीलिंक्स और बिड़ला केबल में निदेशक एवं चेयरमैन के तौर पर बने रहने के लिए हर्षवद्र्घन लोढ़ा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका गुरुवार को खारिज कर दी।
लोढा समूह के अनुसार, इस फैसले से हर्ष लोढ़ा को एमपी बिड़ला समूह की सभी कंपनियों के चेयरमैन के तौर पर बने रहने का रास्ता स्पष्ट हो गया है। अवमानना आवेदनों को खारिज करने की पुष्टि करते हुए बिड़ला पक्ष ने कहा, ‘हम आज जारी किए गए आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे हैं और इसके बाद आगामी कार्यवाही का निर्णय होगा।’
लोढा के वकील देबंजन मंडल (फॉक्स ऐंड मंडल में पार्टनर) ने कहा कि पिछले दो वर्षों में न सिर्फ लोढा पर बल्कि एमपी बिड़ला समूह कंपनियों के स्वतंत्र निदेशकों तथा अधिकारियों पर भी लातार आरोप लगाए गए।
उन्होंने कहा, ‘गुरुवार के निर्णय से यह साबित हुआ है कि इन कंपनियों में स्व. माधव प्रसाद बिड़ला के समय से ही उच्च स्तर के प्रशासनिक मानकों पर अमल किया जाता रहा है।’
बिड़ला पक्ष द्वारा अवमानना याचिका 1 अक्टूबर 2020 को खंडपीठ के आदेश का उल्लंघन करने के आधार पर दायर कराई गई थी।
18 सितंबर, 2020 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने आदेश दिया था कि लोढ़ा को एम पी बिड़ला समूह की किसी भी कंपनी में जिम्मेदारी निभाने से रोका जाए। इस अदोश को लोढ़ा समूह द्वारा खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई थी और इसके बाद एकल पीठ के निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी गई।
हालांकि इस निर्णय की व्याख्या बिड़ला समूह और लोढ़ा समूह द्वारा अलग अलग तरीके से की गई है। लोढ़ा समूह के अनुसार, इस आदेश से लोढ़ा को सभी कंपनियों में बने रहने का रास्ता साफ हुआ है।
लोढ़ा इन कंपनियों के निदेशक के तौर पर कार्य करते रहेंगे और बिड़ला कॉरपोरेशन तथा सूचीबद्घ केबल कंपनियों यूनिवर्सली केबल्स और विंध्य टेलीलिंक्स तथा बिड़ला केबल की बोर्ड बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। इससे बिड़ला पक्ष से अवमानना याचिका को बढ़ावा मिला। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई खंडपीठ द्वारा मार्च-अप्रैल 2021 में की गई थी। लोढ़ा पक्ष ने कहा कि गुरुवार के फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि अदालत को लोढ़ा द्वारा अवमानना से संबंधित कोई तथ्य नहीं मिला और इसलिए उनके खिलाफ मामले को खारिज कर दिया गया।
लोढ़ा समूह ने यह भी कहा है कि अदालत ने यह पाया है कि मौजूदा परिस्थितियों में, निदेशकों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है और उनके खिलाफ मामले खारिज कर दिए गए।