facebookmetapixel
Advertisement
भारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधालाठीचार्ज और पुलिस हिंसा की जांच करेगी 3 सदस्यीय समिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देशपायलटों की आकस्मिक ड्रग जांच 25% करने की मांग, डीजीसीए से एफआईपी की अपीलभारत के समुद्री व्यापार का नया गेटवे बना विझिंजम, 57 लाख टीईयू क्षमता की ओर बढ़ा बंदरगाह

लोढ़ा को अदालत से मिली राहत

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 5:35 AM IST

कलकत्ता उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने बिड़ला कॉरपोरेशन लिमिटेड, यूनिवर्सल केबल्स, विंध्य टेलीलिंक्स और बिड़ला केबल में निदेशक एवं चेयरमैन के तौर पर बने रहने के लिए हर्षवद्र्घन लोढ़ा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका गुरुवार को खारिज कर दी।
लोढा समूह के अनुसार, इस फैसले से हर्ष लोढ़ा को एमपी बिड़ला समूह की सभी कंपनियों के चेयरमैन के तौर पर बने रहने का रास्ता स्पष्ट हो गया है। अवमानना आवेदनों को खारिज करने की पुष्टि करते हुए बिड़ला पक्ष ने कहा, ‘हम आज जारी किए गए आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे हैं और इसके बाद आगामी कार्यवाही का निर्णय होगा।’
लोढा के वकील देबंजन मंडल (फॉक्स ऐंड मंडल में पार्टनर) ने कहा कि पिछले दो वर्षों में न सिर्फ लोढा पर बल्कि एमपी बिड़ला  समूह कंपनियों के स्वतंत्र निदेशकों तथा अधिकारियों पर भी लातार आरोप लगाए गए।
उन्होंने कहा, ‘गुरुवार के निर्णय से यह साबित हुआ है कि इन कंपनियों में स्व. माधव प्रसाद बिड़ला के समय से ही उच्च स्तर के प्रशासनिक मानकों पर अमल किया जाता रहा है।’
बिड़ला पक्ष द्वारा अवमानना याचिका 1 अक्टूबर 2020 को खंडपीठ के आदेश का उल्लंघन करने के आधार पर दायर कराई गई थी।
18 सितंबर, 2020 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के एकल पीठ ने आदेश दिया था कि लोढ़ा को एम पी बिड़ला समूह की किसी भी कंपनी में जिम्मेदारी निभाने से रोका जाए। इस अदोश को लोढ़ा समूह द्वारा खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई थी और इसके बाद एकल पीठ के निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी गई।
हालांकि इस निर्णय की व्याख्या बिड़ला समूह और लोढ़ा समूह द्वारा अलग अलग तरीके से की गई है। लोढ़ा समूह के अनुसार, इस आदेश से लोढ़ा को सभी कंपनियों में बने रहने का रास्ता साफ हुआ है।
लोढ़ा इन कंपनियों के निदेशक के तौर पर कार्य करते रहेंगे और बिड़ला कॉरपोरेशन तथा सूचीबद्घ केबल कंपनियों यूनिवर्सली केबल्स और विंध्य टेलीलिंक्स तथा बिड़ला केबल की बोर्ड बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। इससे बिड़ला पक्ष से अवमानना याचिका को बढ़ावा मिला। अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई खंडपीठ द्वारा मार्च-अप्रैल 2021 में की गई थी। लोढ़ा पक्ष ने कहा कि गुरुवार के फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि अदालत को लोढ़ा द्वारा अवमानना से संबंधित कोई तथ्य नहीं मिला और इसलिए उनके खिलाफ मामले को खारिज कर दिया गया।
लोढ़ा समूह ने यह भी कहा है कि अदालत ने यह पाया है कि मौजूदा परिस्थितियों में, निदेशकों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है और उनके खिलाफ मामले खारिज कर दिए गए।

Advertisement
First Published - April 22, 2021 | 11:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement