ऑक्सीजन की आपूर्ति को औद्योगिक इकाइयों से अस्पतालों की ओर मोडऩे से चुनिंदा उद्योगों के लिए निकट भविष्य में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि विनिर्माण क्षेत्र पर इसका सीमित प्रभाव दिखेगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवधान के कारण कंपनियों के राजस्व में कोई दीर्घकालिक नुकसान होने की आशंका नहीं है। हालांकि विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि कोविड-19 की दूसरी लहर यदि उम्मीद से कहीं अधिक लंबी खिंच जाएगी और उद्योगों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होगी तो प्रभावित क्षेत्रों में नकारात्मक जोखिम बढ़ेगा।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक गौतम साही ने कहा, ‘औद्योगिक उपयोग के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवधान अस्थायी रूप से धातु विनिर्माण, वाहनों के कलपुर्जे, शिपब्रेकिंग, कागज और इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम करने वाली लघु एवं मझोले कंपनियों के राजस्व को अस्थायी रूप से प्रभावित करेगा। इनके पास आमतौर पर निजी ऑक्सीजन संयंत्र नहीं होते हैं और ये वेल्डिंग, कटाई, सफाई एवं रसायनिक प्रक्रियाओं के लिए अपनी जरूरतों को व्यापारी आपूर्तिकर्ताओं के जरिये पूरा करती हैं।’
क्रिसिल के अनुसार, औद्योगिक उपयोग के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति में 6 से 8 सप्ताह के लिए व्यवधान दिख सकता है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि प्रभावित क्षेत्रों में ऑक्सीजन की जरूरतों को फिलहाल इन्वेंट्री के जरिये काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। साही ने कहा, ‘इसलिए हमारा मानना है कि उनके राजस्व में मामूली गिरावट दिखेगी। उनका क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहने की उम्मीद है।’
प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऑक्सीजन की आपूर्ति को औद्योगिक इकाइयों से चिकित्सकीय उपयोग के लिए मोडऩे से चुनिंदा क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा। प्रभुदास लीलाधर की श्वेता दफ्तरदार ने 17 अप्रैल के अपने नोट में लिखा है, ‘अपने परिचालन के लिए कच्चे माल और ऑक्सीजन पर निर्भर (उदाहरण के लिए, मोल्डिंग, फैब्रिकेशन, वाहनों के कलपुर्जे आदि) रहने वाले चुनिंदा विनिर्माण क्षेत्रों(जैसे इस्पात, सीमेंट एवं खनन) पर आगामी पखवाड़े में इसका प्रभाव दिख सकता है।’
बढ़ती मांग
गंभीर रूप से संक्रमित कोविड रोगियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनजर देश में चिकित्सा उपयोग के लिए ऑक्सीजन की मांग में जबरदस्त उछाल दिख रहा है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने 22 अप्रैल 2021 से ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग पर प्रतिबंध (नौ उद्योगों को छोड़कर) लगा दिया है। खबरों के अनुसार जिन नौ उद्योगों को उनके परिचालन को निर्बाध बनाए रखने के लिए ऑक्सीजन के उपयोग की अनुमति दी गई है उनमें एम्पूल्स ऐंड वायल्स, फार्मास्युटिकल्स, पेट्रोलियम रिफाइनरी, इस्पात, परमाणु ऊर्जा, ऑक्सीजन सिलेंडर विनिर्माण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, खाद्य एवं जल शोधन और प्रॉसेस उद्योग शामिल हैं।
किसिल ने कहा, ‘चिकित्सा उपयोग वाले ऑक्सीजन की मांग कोविड पूर्व स्तर के मुकाबले अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पांच गुना बढऩे का अनुमान है क्योंकि कोविड-19 संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।’ उद्योग के आकलन के अनुसार, देश में तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) की कोविड पूर्व मांग करीब 700 टन प्रति दिन थी। पिछले साल कोविड-19 की पहली लहर के दौरान एलएमओ की मांग चार गुना बढ़कर 2,800 टन प्रति दिन तक पहुंच गई थी।
उद्योग में ऑक्सीजन की खपत दो तरीके- ऑनसाइट और व्यापारिक बिक्री- से होती है। ऑनसाइट उपयोग निजी संयंत्रों के जरिये प्रॉसेस संचालित उद्योगों (सरकार द्वारा छूट दिए गए नौ क्षेत्रों सहित) के लिए होता है। देश में उत्पादित ऑक्सीजन में इनकी हिस्सेदारी 75 से 80 फीसदी होती है। शेष 20 से 25 फीसदी ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यापारिक बिक्री के जरिये की जाती है जिसे तरल ऑक्सीजन कहा जाता है। इसकी आपूर्ति क्रायोजेनिक टैंकों और सिलेंडरों के जरिये की जाती है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में करीब 10 फीसदी व्यापारिक ऑक्सीजन की खपत होती है।