बाहर निकलो या भारत जाकर नौकरी करो। सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आईबीएम आजकल अमेरिका और कनाडा में अपने कर्मचारियों के सामने यही बात कह रही है।
कंपनी अपने कर्मचारियों के सामने भारत के साथ-साथ नाइजीरिया, चीन और ब्राजील का भी विकल्प रख रही है। प्रोजेक्ट मैच नामक इस परियोजना के तहत कंपनी कर्मचारियों को न केवल वहां जाने का खर्च दे रही है बल्कि वीजा तैयार कराने में भी मदद कर रही है।
उद्योग सूत्रों का कहना है कि ऐसी शर्त रख कर कंपनी उत्तरी अमेरिका के अपने कर्मचारियों को पूर्वी यूरोप के मुल्कों में भेजना चाहती है। इसकॅ बारे में कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि वह कंपनी के अंदरुनी मामलों के बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं।
सीएनएन के मुताबिक, छंटनी के शिकार हो चुके लोगों को भारत, नाइजीरिया और रूस जैसे देशों में नौकरियों की पेशकश की जा रही है। सीएनएन के मुताबिक, उसे आईबीएम के कुछ गुप्त दस्तावेज मिले हैं। इस दस्तावेज में कंपनी अपने यहां काम कर चुके कर्मचारियों को उनकी योग्यता के लिहाज से नौकरियां मुहैया कराने में मदद करेगी। आईबीएम की नजर उन देशों पर है, जहां अब भी नौकरियां मिल रही हैं।
दस्तावेज के मुताबिक, ”भारत, नाइजीरिया और रूस में नौकरी मिलने पर कंपनी उनके जाने का खर्च उठाएगी और वीजा और अन्य सहायता भी देगी।” कंपनी चीन, ब्राजील, चेक गणराज्य, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और संयुक्त अरब अमीरात में भी नौकरियों की पेशकश कर रही है।
इस दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि आईबीएम उन्हीं लोगों को यह पेशकश करेगी जिनका प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। लेकिन उन्हें आईबीएम (अमेरिका या कनाडा) से निकाला जा चुका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो कर्मचारी इन देशों में काम करेंगे उन्हें स्थानीय नियम और शर्तों पर काम करना होगा। इन कर्मचारियों को वेतन भी कम दिया जाएगा। योजना के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से नौकरियों में 4,000 की कटौती हो जाएगी। हालांकि अभी तक कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया गया है। मालूम हो कि आईबीएम इंडिया में 75,000 कर्मचारी हैं।