विविध कारोबार करने वाली कंपनी आईटीसी लिमिटेड ने 2030 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अपनी 100 फीसदी बिजली खरीद जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी पिछले दो दशकों से अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ा रही है। कंपनी 40 फीसदी से अधिक बिजली ऊर्जा जरूरतों को पवन, सौर एवं बायोमास जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करती है। कंपनी ने अपनी अक्षय ऊर्जा परिसंपत्तियों पर अब तक करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
कंपनी ने 2030 तक अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली की 100 फीसदी जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उसका कुल लक्ष्य इस अवधि में अपनी 50 फीसदी ऊर्जा जरूरतों को अक्षय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करना है। दुनिया भर में कंपनियां अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की ओर तेजी से आकर्षित हो रही हैं और लक्ष्य निर्धारित करना उसे हासिल करने की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। कंपनी ने कहा है कि अपनी सस्टेनेबिलिटी 2.0 विजन के तहत आईटीसी अपने अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए आगे निवेश करने की योजना बना रही है ताकि कंपनी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में अपना सार्थक योगदान दे सके। हालांकि भविष्य की परियोजनाओं में निवेश के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। आईटीसी वर्तमान में बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और तमिलनाडु में 50 मेगावॉट की कुल ऑफसाइट सौर ऊर्जा परियोजनाओं का संचालन कर रही है। इसके अलावा कंपनी पश्चिम बंगाल में भ्भी ऑफसाइट सौर परियोजना को तैयार कर रही है ताकि राज्य के भीतर उसके संयंत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा किया जा सके। साथ ही पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में ऑनसाइट सौर परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। कंपनी के एकीकृत उपभोक्ता वस्तु विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक प्रतिष्ठïानों और कारखानों एवं गोदामों की छतों का उपयोग भी सौर ऊर्जा के उत्पादन के लिए किया जा रहा है।
आईटीसी लिमिटेड के समूह प्रमुख (आरऐंडडी, स्थिरता एवं परियोजना) संजीव रंगरास ने जलवायु संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए आईटीसी की पहल के बारे में बताते हुए कहा, ‘दो दशक से सभी कारोबारी परिचालन में स्थिरता को बनाए रखते हुए हमने कम कार्बन उत्सर्जन के लिए एक योजना पर काम किया है। इसमें अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो का विस्तार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। ऊर्जा एवं उत्सर्जन संबंधी प्रदर्शन में निरंतर सुधार लाने के लिए हमने ऊर्जा एवं ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए खास लक्ष्य निर्धारित किए हैं।’