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गूगल का बड़ा AI दांव, भारत को बनाएगा अगला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब; फ्री कोर्स से स्कूलों तक नई पहल

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गूगल आई/ओ कनेक्ट 2026 में भारत को एआई हब बनाने के लिए नए फीचर्स, मुफ्त कोर्स, शिक्षकों के लिए एटीएल साथी और 25 भारतीय भाषाओं में जेमिनाई लाइव की घोषणा हुई

Last Updated- July 14, 2026 | 10:08 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

गूगल ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अगले बड़े केंद्र के रूप में तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी मकसद से कंपनी ने मंगलवार को नए सुरक्षा फीचर, ऑन-प्रिमाइस एआई कंप्यूटिंग विकल्प और एआई शिक्षा से जुड़े कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की। इसका मकसद देश के उद्यमों, डेवलपर और स्टार्टअप को नए दौर के लिए तैयार करना है क्योंकि अब एआई सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई काम अपने आप करने में भी सक्षम होगा।

बेंगलूरु में आयोजित गूगल आई/ओ कनेक्ट इंडिया 2026 कार्यक्रम में कंपनी ने यह भी बताया कि तीसरे पक्ष के आकलन के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में गूगल प्ले और एंड्रॉयड तंत्र ने ऐप डेवलपर और देश की अर्थव्यवस्था के लिए करीब 5.3 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की संभावनाएं तैयार कीं। यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा है।

गूगल डीपमाइंड में भारत और एशिया-प्रशांत (एपीएसी) के वरिष्ठ निदेशक डॉ. मनीष गुप्ता ने कहा कि एआई की असली सफलता केवल उसके तकनीकी स्तर से नहीं बल्कि लोगों और समाज में आने वाले सकारात्मक बदलाव से तय होती है।

इस कार्यक्रम के दौरान गूगल ने भारत में एआई शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो नई पहल भी शुरू कीं। इनका उद्देश्य देश में एआई शोध, डेवलपर और शिक्षण से जुड़े नए विशेषज्ञ तैयार करना है।

इनमें से एक पहल के तहत गूगल डीपमाइंड का ‘एआई रिसर्च फाउंडेशंस’ पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाएगा। यह 56 घंटे का मुफ्त ऑनलाइन कोर्स है, जिसमें प्रतिभागियों को लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) तैयार करने, उन्हें बेहतर बनाने और अत्याधुनिक एआई शोध करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

गूगल डीपमाइंड ने अटल इनोवेशन मिशन के साथ मिलकर ‘एटीएल साथी’ नाम का एक नया एआई असिस्टेंट लॉन्च किया है। यह जेमिनाई आधारित वेब टूल है, जिसे खास तौर पर शिक्षकों की मदद के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, इस साल इसकी शुरुआत 100 स्कूलों में की जाएगी। आगे चलकर इसे अटल टिंकरिंग लैब्स से जुड़े 10,000 स्कूलों तक पहुंचाने की योजना है।

इसके अलावा, गूगल ने बताया कि एम्स दिल्ली के शोधकर्ता उसके ओपन-सोर्स मेडजेम्मा एआई मॉडल का इस्तेमाल कर भारत की जरूरतों के हिसाब से नए एआई टूल तैयार कर रहे हैं। इनका इस्तेमाल कुष्ठ रोग और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में मदद के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा, गूगल ने अपने जेमिनाई लाइव फीचर का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब यह संस्कृत, भोजपुरी और मैथिली समेत 25 भारतीय भाषाओं और बोलियों में कारगर होगा। 

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First Published - July 14, 2026 | 10:04 PM IST

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