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भारत की अपनी ‘क्वांटम वैली’: अमरावती में लगेगा $1 अरब का निवेश, बदल जाएगी तकनीक की दुनिया

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मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती में भारत की पहली क्वांटम रेफरेंस सुविधा शुरू की है। इसका लक्ष्य 2029 तक $1 अरब निवेश के साथ आत्मनिर्भर क्वांटम इकोसिस्टम बनाना है

Last Updated- April 14, 2026 | 10:42 PM IST
Quantum Computing
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती ने क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया में भारत के औपचारिक दस्तक का बिगुल बजा दिया है। यह शहर भारत के भविष्य के तकनीकी सपनों को परवाज देने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को एक ‘क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी’ की शुरुआत की जिसका उद्देश्य भारत का ‘पहला संप्रभु हार्डवेयर ढांचा’ तैयार करना और देश में उन्नत कंप्यूटिंग प्रणाली तैयार करने प्रक्रिया को रफ्तार देना है।

नायडू ने अमरावती क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटीज (एक्यूआरएफ) की शुरुआत के मौके पर कहा,‘देश की पहली क्वांटम रेफरेंस सुविधा की शुरुआत उन्नत प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के सफर में मील का पत्थर है। यह पहल आंध्र प्रदेश को क्वांटम नवाचार के केंद्र के रूप में पहचान दे रही है।’ इसमें एक निजी कॉलेज में अमरावती 1एस और मेधा टावर्स में अमरावती 1क्यू शामिल होंगे।

यह महत्त्वाकांक्षी ‘क्वांटम वैली’ परियोजना का हिस्सा है जिसे मुख्यमंत्री नायडू और उनकी टीम राजधानी अमरावती में विकसित कर रही है। क्वांटम वैली परियोजना आईबीएम, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) और लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) जैसी दिग्गज कंपनियां तैयार कर रही हैं। अमरावती क्वांटम वैली (एक्यूवी) एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है जो इस क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देगी और उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2029 तक इसमें 1 अरब डॉलर का निवेश आएगा। राज्य ने अगले दो वर्षों के भीतर क्वांटम कंप्यूटरों का उत्पादन शुरू करने और उनका निर्यात करने का लक्ष्य रखा है।

नायडू ने कहा कि क्वांटम हार्डवेयर टेस्टबेड क्वांटम उपकरणों के परीक्षण और प्रमाणीकरण में सहायक होंगे। एक्यूआरएफ शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और छात्रों को प्रोसेसर, क्रायोजेनिक सिस्टम, एम्पलीफायर और कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे घटकों तक सीधे पहुंच, अवलोकन और परीक्षण करने का अवसर भी प्रदान करेगा।

अमरावती में स्थित विश्व का पहला एकीकृत क्वांटम कंप्यूटिंग ढांचा पहले ही निवेशकों, उद्योग जगत और शिक्षाविदों का ध्यान आकर्षित कर चुका है और यह एक वैश्विक प्रतिभा केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसे शिक्षण प्रयोगशालाओं के लिए 108 संस्थानों से 134 प्रस्ताव, एल्गोरिदम अनुसंधान के लिए 55 संस्थानों से 84 प्रस्ताव आए हैं। इनके अलावा, 137 कॉलेजों से 1,127 हैकाथॉन से जुड़े विचार और 20 स्टार्टअप प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह ‘स्वर्ण आंध्र 2047’ की व्यापक योजना का हिस्सा है जिसमें उन्नत प्रौद्योगिकी एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। यह सुविधा मात्र आठ महीनों में विकसित की गई है।

राज्य सरकार ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सहयोग से आर्टिफिशल इंटेलिजेंस(एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में लगभग 45 लाख लोगों को कौशल प्रदान करने की योजना बनाई है। माना जा रहा है कि अमरावती रिफाइंडर (एक्यूआरएफ) परियोजना टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और अन्य संस्थानों के एक समूह द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।

राज्य सरकार अमरावती को एक पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ विश्व के शीर्ष पांच क्वांटम केंद्रों में शामिल करना चाहती है। वह क्रायोजेनिक, सेमीकंडक्टर, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन के साथ क्वांटम आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण भी करना चाहती है। साथ ही, एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा, आरएफ इंजीनियरिंग, उन्नत सामग्री और हार्डवेयर डिजाइन में कौशल प्रदान करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। क्वांटम वैली परियोजना बोस्टन, म्यूनिख और विश्व के अन्य आठ चुनिंदा शहरों में स्थित इसी तरह के केंद्रों की तर्ज पर तैयार की जा रही है।

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First Published - April 14, 2026 | 10:29 PM IST

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