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IRDAI का बड़ा एक्शन! कुछ Insurance CEOs की परफॉर्मेंस पे क्यों रोकी गई, जानें वजह

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IRDAI ने खर्च सीमा और नियमों का पालन न करने पर कुछ बीमा कंपनियों के CEOs की परफॉर्मेंस आधारित सैलरी रोक दी है।

Last Updated- May 21, 2026 | 8:25 AM IST
Insurance
Representative image

बीमा क्षेत्र के नियामक IRDAI ने कुछ बीमा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों यानी CEOs की परफॉर्मेंस आधारित सैलरी पर रोक लगा दी है। यह कदम उन कंपनियों के खिलाफ उठाया गया है, जो “एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट” यानी EoM से जुड़े तय लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकीं या फिर तय किए गए सुधार के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ीं।

सूत्रों के मुताबिक यह फैसला वित्त वर्ष 2024-25 के प्रदर्शन और वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआती तिमाहियों के रुझानों की समीक्षा के बाद लिया गया है। नियामक ने साल 2026 के शुरुआती महीनों में भी कंपनियों की स्थिति का आकलन किया था।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार बीमा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 खत्म होने के बाद अपने बोर्ड से मंजूर वेतन प्रस्ताव IRDAI को भेजे थे। इनमें CEOs और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के लिए तय किए गए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और बोनस भी शामिल थे।

लेकिन जिन कंपनियों का खर्च स्तर तय सीमा से काफी ऊपर पाया गया और जिन्होंने अपने तय “ग्लाइड पाथ” का पालन नहीं किया, वहां IRDAI ने वेरिएबल पे यानी प्रदर्शन आधारित भुगतान को मंजूरी नहीं दी।

हालांकि नियामक ने अधिकारियों की फिक्स सैलरी में कोई दखल नहीं दिया है।

EoM नियमों को लेकर क्यों बढ़ी सख्ती

बीमा कंपनियों के लिए EoM यानी प्रबंधन खर्च की एक सीमा तय की गई है। इसका मकसद कंपनियों के खर्चों को नियंत्रित रखना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना है।

नियमों के अनुसार सामान्य बीमा कंपनियां अपने ग्रॉस रिटन प्रीमियम यानी GWP का अधिकतम 30 प्रतिशत तक प्रबंधन खर्च कर सकती हैं। वहीं स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा 35 प्रतिशत तय की गई है।

अगर कोई कंपनी इन सीमाओं से ऊपर जाती है, तो उसे बोर्ड से मंजूर एक योजना देनी होती है जिसमें बताया जाता है कि वह तय समय तक खर्च को कैसे नियंत्रित करेगी।

FY26 तक दिया गया था समय

IRDAI ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वित्त वर्ष 2025-26 तक कंपनियों को या तो पूरी तरह EoM नियमों का पालन करना होगा या फिर उस दिशा में ठोस प्रगति दिखानी होगी।

उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जिन कंपनियों ने धीरे-धीरे अपने खर्च कम किए और सुधार के संकेत दिए, उनके प्रति नियामक का रवैया अपेक्षाकृत नरम रहा। लेकिन जहां खर्च में कोई खास कमी नहीं दिखी या लक्ष्य से बहुत ज्यादा विचलन रहा, वहां सख्त कदम उठाए गए।

10 प्रतिशत से ज्यादा अंतर पर कार्रवाई का प्रावधान

नियमों के तहत अगर किसी बीमा कंपनी का वास्तविक खर्च उसके बोर्ड द्वारा तय बिजनेस प्लान की सीमा से 10 प्रतिशत से ज्यादा ऊपर चला जाता है, तो IRDAI को वरिष्ठ अधिकारियों की वेरिएबल पे रोकने का अधिकार है।

सूत्रों के मुताबिक जिन कंपनियों पर सवाल उठे, उनसे विस्तृत जवाब भी मांगा गया। कई मामलों में CEOs की वित्त वर्ष 2024-25 से जुड़ी परफॉर्मेंस पे की मंजूरी फिलहाल टाल दी गई है।

नई कंपनियों को मिली कुछ राहत

नियमों में पांच साल से कम पुरानी बीमा कंपनियों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी रखा गया है। ऐसी कंपनियों को जरूरत के आधार पर नियामकीय छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके बावजूद उन्हें भी अपने खर्च नियंत्रण की स्पष्ट योजना दिखानी होती है।

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First Published - May 21, 2026 | 8:25 AM IST

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