स्नातक की तरह पड़ाव है आईपीओ

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:35 PM IST

बीएस बातचीत
नायिका ने न केवल अपने संस्थापकों व निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है बल्कि इसने महिला उद्यमियों की ताकत को भी प्रदर्शित किया है। कंपनी हाल में निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया के साथ सूचीबद्ध हुई है। नायिका के आईपीओ मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया का मतलब है कि उसकी संस्थापक उद्यमी फाल्गुनी नायर अब कुछ पल के लिए विश्राम कर सकती हैं। उन्होंने शिवानी शिंदे से बातचीत में नायिका के आईपीओ, भारतीय एचएनआई की भूमिका आदि तमाम मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
बंपर सूचीबद्ध दौर के बाद आप जिंदगी में किस प्रकार का बदलाव महसूस करती हैं?
मुझे बिल्कुल वैसा ही महसूस हो रहा है जैसा इस सफर की शुरुआत में और निवेशकों के साथ रोड शो के दौरान महसूस हो रहा था। पिछले कुछ महीनों के दौरान हमारा सफर काफी शानदार रहा है। निवेशकों की गुणवत्ता और खुद से पूछे गए सवाल एक सीख रही है। हमने करीब 120 निवेशकों से मुलाकात की थी और वे उच्च गुणवत्ता वाले दीर्घावधि निवेशक थे जिन्होंने वास्तव में काफी कठिन सवाल पूछा था। मैं समझती हूं कि हमें कंपनी और रणनीति को लेकर कहीं अधिक विश्वास था। सूचीबद्ध होना और इस दौरान जबरदस्त समर्थन मिलना हमारी कहानी में भरोसे का परिचायक है। मैं समझती हूं कि सूचीबद्धता और शेयर के प्रदर्शन  में लोगों के प्यार और भरोसे की झलक मिलती है। मैं समझती हूं कि हमारे कारोबार को समझने के लिए निवेशकों ने जो प्रयास किए हैं वे वास्तव में आश्चर्यजनक हैं।

आगे की राह क्या होगी? क्या अब आपका लक्ष्य बदल गया है?
मैंने हमेशा कहा है कि आईपीओ स्नातक की तरह है। असल जिंदगी स्नातक के बाद शुरू होती है क्योंकि आप वास्तविक दुनिया में कदम रखते हैं। कल से हमें कहीं अधिक जवाबदेह बनना पड़ेगा। मैं समझती हूं कि जब आप सार्वजनिक (सूचीबद्ध) होते हैं तो आपको कहीं अधिक जवाबदेह होना पड़ता है और हम हजारों निवेशक हमारे परिवार का हिस्सा हैं। पूंजी आवंटन हो गया है लेकिन अब हमें दीर्घावधि नजरिये से काम करने की आवश्यकता है। इस दौरान हम उभरती प्रौद्योगिकी के अवसर का फायदा उठा सकते हैं।
वित्त पोषण के संदर्भ में भारत में इंटरनेट आधारित कारोबार के बारे में आपकी क्या राय है?
जब हम रकम जुटा रहे थे तो हमने बाहरी पूंजी हासिल करने का प्रयास नहीं किया था। मैं निवेश हासिल करना चाहती थी लेकिन रकम जुटाने में देरी की। जब हमने शुरुआत की थी तो हम कोई विदेशी स्वामित्व वाली कंपनी नहीं थे। इसलिए हमने खुद की पूंजी के साथ शुरुआत की थी और इसलिए हमारी हैसियत काफी अधिक है। पहले दो साल तक हमने कोई रकम नहीं जुटाई। हमने सबसे पहले 2014 में रकम जुटाई थी। ऐसा किसी भारतीय द्वारा प्रबंधित कंपनी के पुनर्गठन के बाद ही किया गया था। हमने हमेशा भारतीय पूंजी जुटाई।

क्या आपने निवेश समेटने के बारे में कभी सोचा है?
मैं कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा है कि मैं कंपनी को बेचना नहीं चाहूंगी। मैं इसे अपने पास रखना चाहूंगी और इसे अपने परिवार का हिस्सा बनाना चाहूंगी। यह मेरे लिए रोमांच का एक स्रोत है और मैं जो कुछ भी कर रही हूं उससे मुझे प्यार है। मैं समझती हूं कि इससे मुझे एक उद्देश्य मिलता है। नायिका को एक व्यापक श्रेणी तक पहुंचाने के लिए मेरे पास अभी भी काफी ऊर्जा और विचार मौजूद हैं।
विशेष तौर पर महिला संस्थापकों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
मैं हमेशा मजाक में कहूंगी कि कोई भी काम आखिरी पड़ाव नहीं हो सकता। महिलाओं के लिए परिवार और बच्चे प्राथमिकता के मोर्चे पर हमेशा ऊपर होते हैं लेकिन मैं समझती हूं कि आपको अपनी व्यावसायिक पसंद को भी थोड़ी अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए। हमें प्राथमिकताओं में उचित संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है। मैं समझती हूं कि महिलाओं को भी अपने सपने को साकार करने का अधिकार है। महिलाओं को सपने से डरना नहीं चाहिए बल्कि उसे पूरा करने के लिए आगे बढऩा चाहिए।

First Published : November 13, 2021 | 12:16 AM IST