महंगाई से बिगड़ेगी योजना!

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:26 PM IST

रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड ने आज कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थितियां और जिंसों की कीमतों में लगातार आ रही तेजी से कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है। एजेंसी ने कहा कि इससे निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय और निवेश की योजना में मध्यावधि के हिसाब से सुस्ती आ सकती है। इसका मतलब यह है कि केंद्र व राज्य सरकारों के पूंजीगत व्यय की योजनाएं अहम बनी रहेंगी।
इक्रा ने कहा कि उसे उम्मीद है कि व्यापक पैमाने पर क्षमता में विस्तार के लिए अहम है कि क्षमता का उपयोग 75 प्रतिशत तक पहुंचे और ऐसा चालू कैलेंडर साल के अंत तक ही होने की संभावना है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘निजी निवेश में कुछ बेहतर संकेत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों और जिंसों के बढ़े दाम से कॉर्पोरेट सेक्टर का मुनाफा सिकुड़ सकता है। इसकी वजह से मध्यावधि के हिसाब से
निजी क्षेत्र पूंजीगत व्यय में सावधानी बरतेगा।’
नायर ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार का पूंजीगत व्यय, खासकर राज्यों द्वारा किया जाने वाला व्यय निवेश मांग को समर्थन करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में अगले दो से तीन तिमाही के दौरान अहम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय विस्तार की घोषणा की जाएगी, लेकिन इसमें बिजली व धातु जैसे क्षेत्र और पीएलआई योजना से जुड़े क्षेत्र ही शामिल होंगे।
एसोचैम के अध्यक्ष सुमंत सिन्हा और भारतीय उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन ने अलग अलग बातचीत में बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि कंपनियां बढ़ी लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डाल पाने में सक्षम नहीं होंगी क्योंकि उपभोक्ताओं की महंगाई दर बढ़ी हुई है। ऐसे में उनका मुनाफा प्रभावित हो सकता है। नरेंद्रन ने कहा कि सड़क, रेलवे, पोर्ट, एविएशन आदि जैसे परंपरागत बुनियादी ढांचा क्षेत्र में केंद्र का पूंजीगत व्यय गतिविधियों के संचालन को बल दे सकता है।
इक्रा की नायर ने कहा कि इस बात के सकारात्मक संकेत थे कि निजी क्षेत्र में निवेश की गतिविधियां बढ़ेंगी, क्योंकि वित्त वर्ष 22 में निजी क्षेत्र की परियोजनाओं की घोषणा 11 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं।

First Published : April 29, 2022 | 12:41 AM IST