एकाधिकार व्यापार रोधी नियामक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में सामने आने वाले किसी भी प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार पर कार्रवाई करने के लिए कमर कस रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने ‘प्रतिस्पर्धा कानून के अर्थशास्त्र’ पर 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान आज अपने विशेष संबोधन में यह बात कही।
कौर ने कहा कि सीसीआई ने संभावित प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहारों की पहचान की है, जो एआई की मूल्य श्रृंखला में दबदबे के रूप में हो सकते हैं। इनमें एल्गोरिदम वाली मिलीभगत, लक्षित मूल्य भेदभाव और खुद को प्राथमिकता देना शामिल हो
सकता है।
सीसीआई की चेयरपर्सन ने कहा, ‘शुरुआती कदम के तौर पर हमने एक ‘दिशानिर्देश नोट’ जारी किया है। यह नोट हितधारकों को ‘सेल्फ-ऑडिट’ की सुविधा देता है, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उन एआई ऐप्लिकेशन के विकास, तैनाती और निगरानी के चरणों में कोई ऐसा छिपा हुआ प्रतिस्पर्धा विरोधी परिणाम सामने न आए, जो कभी जान-बूझकर तो कभी अनजाने में हो सकता है।’
सीसीआई ने पिछले साल आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर बाजार अध्ययन किया था। इस अध्ययन में जिम्मेदार स्वायत्तता की वकालत करते हुए उद्यमों से आग्रह किया गया था कि वे एआई प्रणालियों का ‘सेल्फ-ऑडिट’ करें, ताकि प्रतिस्पर्धा से जुड़ी संभावित चिंताओं का समाधान किया
जा सके।
अक्टूबर 2025 में जारी इस अध्ययन में कहा गया था कि भारत का दृष्टिकोण नाजुक लेकिन अहम संतुलन बनाने का है। इसके तहत बाजार की विकृतियों को नियंत्रित करते हुए और तकनीकी क्षेत्र की सभी कंपनियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हुए नवाचार, डिजिटल उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा।’
कौर ने कहा कि सीसीआई ब्रिक्स देशों के समूह के ढांचे के तहत अक्षय ऊर्जा क्षेत्र का भी अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन का उद्देश्य इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना है।
उन्होंने कहा कि यह नियामक संस्था खेल, नागरिक उड्डयन, पेंट और वार्निश तथा शराब जैसे क्षेत्रों में भी एकाधिकार व्यापार रोधी संबंधी मसलों पर नजर रख रही है।