भारत के कोर सेक्टर में तेजी थम गई है। फरवरी 2026 में कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ग्रोथ महज 2.3 फीसदी रह गई, जो जनवरी के 4.7 फीसदी से आधी हो गई। इससे साफ है कि वित्त वर्ष 2025-26 में इन सेक्टरों का प्रदर्शन पिछले छह सालों में सबसे कमजोर रहने वाला है।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक के पहले 11 महीनों में कोर सेक्टर की औसत बढ़ोतरी सिर्फ 2.9 फीसदी रही। पिछले साल यानी FY25 की इसी अवधि में यह 4.4 फीसदी थी। आठ कोर सेक्टर में से फरवरी में पांच ने तो बढ़त दिखाई, लेकिन छह सेक्टरों की रफ्तार जनवरी से धीमी पड़ गई। खासकर रिफाइनरी प्रोडक्ट्स में 1 फीसदी की गिरावट आई, जबकि जनवरी में यह बिल्कुल स्थिर था।
क्रूड ऑयल का उत्पादन लगातार छठे महीने घटा और फरवरी में 5.2 फीसदी कम हुआ। नैचुरल गैस भी 20वें महीने लगातार नीचे आया, जिसमें 5 फीसदी की कटौती दर्ज हुई, ठीक जनवरी जितनी ही। बिजली बनाना भी धीमा पड़ गया और ग्रोथ तीन महीने के सबसे निचले स्तर 0.5 फीसदी पर आ गई।
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि वेस्ट एशिया के संकट से पहले ही फरवरी में कोर सेक्टर की ग्रोथ तीन महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी थी। जनवरी से फरवरी के बीच यह गिरावट ज्यादातर सेक्टरों में फैली हुई थी। सिर्फ सीमेंट में 9.3 फीसदी और स्टील में 7.2 फीसदी की बढ़त देखी गई, बाकी ज्यादातर सेक्टर 3.5 फीसदी से नीचे रहे।
कोर सेक्टर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का लगभग 40 फीसदी वजन रखते हैं। नायर का मानना है कि फरवरी में IIP की ग्रोथ जनवरी के 4.8 फीसदी से घटकर करीब 4 फीसदी रह सकती है।
कोर सेक्टर की इतनी कमजोर ग्रोथ आखिरी बार कोविड के दौर में 2020-21 में देखी गई थी, जब उत्पादन 6.4 फीसदी घट गया था। उससे पहले 2019-20 में यह सिर्फ 0.4 फीसदी बढ़ा था।