Morbi Tile Industry: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की टाइल इंडस्ट्री तक पहुंच गया है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के मोरबी में टाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों में उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 मार्च से LNG और प्रोपेन गैस की सप्लाई रुकने के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इसकी वजह से मोरबी की करीब 25 प्रतिशत फैक्ट्रियां या तो बंद हो चुकी हैं या उत्पादन कम कर दिया है।
फिलहाल फैक्ट्रियां गुजरात गैस की सप्लाई पर निर्भर हैं, लेकिन निर्माताओं का कहना है कि यह सप्लाई ज्यादा दिन नहीं चलेगी। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो करीब 400 और यूनिट बंद होने की आशंका है। इसका असर अब दूसरे शहरों में भी दिखने लगा है। गाजियाबाद और नोएडा जैसे बाजारों में टाइल की सप्लाई कम हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा हालात जारी रहते हैं तो इंडस्ट्री को बड़े स्तर पर उत्पादन रोकना पड़ सकता है। कई निर्माता एक महीने तक फैक्ट्रियां बंद करने पर विचार कर रहे हैं। अगर तनाव 2-3 हफ्ते तक बना रहा, तो 30 से 45 दिन तक बंदी हो सकती है। वहीं अगर स्थिति और बिगड़ी, तो 2 महीने तक उत्पादन शुरू होना मुश्किल हो सकता है।
गैस और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण कंपनियों ने कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। पिछले एक हफ्ते में टाइल के दाम करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ाए गए हैं। डीलरों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल कुछ डीलर पुराने स्टॉक के कारण कीमत नहीं बढ़ा रहे, लेकिन आगे उन्हें भी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दो हफ्तों में माल ढुलाई यानी फ्रेट की लागत भी काफी बढ़ गई है। इसका असर जल्द ही ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर निर्यात पर भी पड़ा है। मोरबी से होने वाला करीब 25 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र में जाता है, लेकिन अब शिपमेंट लगभग बंद हो गया है। कंटेनर के किराए में 20 से 30 गुना तक बढ़ोतरी हो गई है, जिससे निर्यात करना घाटे का सौदा बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो इंडस्ट्री को लंबी अवधि तक बंद रहना पड़ सकता है। इससे सप्लाई और कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा। हालांकि, इससे देश की बड़ी टाइल कंपनियों जैसे कजारिया और सोमानी को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उनके पास बेहतर सप्लाई और बाजार पकड़ है।