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MSME सेक्टर में AI का कमाल: 2035 तक होगा 150 अरब डॉलर का फायदा, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अपनाने से भारतीय एमएसएमई 2035 तक 150 अरब डॉलर का मूल्य सृजन कर सकते हैं, जिससे उत्पादकता, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारी सुधार होगा

Last Updated- March 08, 2026 | 10:25 PM IST
artificial intelligence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस अपनाने से 2035 तक विनिर्माण एमएसएमई में लगभग 135.6 से 149.9 अरब डॉलर का मूल्य सृजन हो सकता है। देश के सकल विनिर्माण मूल्यवर्धन में एमएसएमई की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी को देखते हुए एक अध्ययन में  पीडब्ल्यूसी इंडिया और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने यह अनुमान लगाया है।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के चेयरपर्सन संजीव कृष्णन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘एआई पर अब बड़े उद्यमों का एकाधिकार नहीं है। यह एमएसएमई  को कम उत्पादकता के जाल से बाहर निकलने और गुणवत्ता, गति और नवाचार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकता है। इसकी भूमिका सहयोगी की होगी, न कि यह किसी की जगह लेगा। साथ ही इससे नौकरियों और आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलेपन में मजबूती आएगी।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षमता संबंदी बाधाओं को कम करके और पैमाने संबंधी लागत को कम करके एआई छोटी कंपनियों को स्थिरता में सुधार करने, वैश्विक मानकों को पूरा करने और उत्पादन को तेजी से बढ़ाने में मदद कर सकता है। 

इसमें कहा गया है कि एमएसएमई हार्नेस, कूलिंग उपकरण और औद्योगिक पुर्जों जैसे कम तकनीक वाली पूंजीगत वस्तुओं की आपूर्ति कर सकते हैं, जिससे समय के साथ 100 से 150 अरब डॉलर के विनिर्माण के अवसर मिलेंगे , क्योंकि डेटा सेंटर और सेमी कंडक्टर के क्षेत्र में भारी निवेश होना है।

‘अनलॉकिंग द एआई एज फॉर एमएसएमई’ नामक अध्ययन में एआई अपनाने के लिए मानव केंद्रित, संवर्धन की प्रमुखता के दृष्टिकोण की जरूरत पर जोर दिया गया है। श्रम को विस्थापित करने के बजाय जिम्मेदार एआई की तैनाती से उत्पादकता, सुरक्षा और निर्णय लेने में सुधार हो सकता है। वहीं इससे खासकर श्रम केंद्रित विनिर्माण क्लस्टरों में नौकरियों की सुरक्षा भी हो सकती है।  रिपोर्ट में 3ए2आई फ्रेमवर्क यानी एक्सेस, एक्सेप्टेंस, एसिमिलेशन, इंप्लीमेंटेशन और इंस्टीट्यूशनलाइजेशन का सुझाव देते हुए कहा गया है कि यह एमएसएमई, नीति निर्माताओं और इसमें काम करने वाले साझेदारों के लिए व्यावहारिक खाका हो सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है,  ‘अगर हमारा देश विनिर्माण की जीडीपी में हिस्सेदारी बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने के लक्ष्य को पूरा करता है और एमएसएमई अपनी हिस्सेदारी भारत के विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में हिस्सेदारी  2023-24 के 35.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 50 प्रतिशत करता है तो 20247 तक 3.13 से 3.21 लाख करोड़ डॉलर तक वृद्धि के अवसर खोल सकता है।’

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First Published - March 8, 2026 | 10:25 PM IST

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