एयरस्पेस पर रोक, विमानों और उनके पुर्जों की डिलिवरी पर असर डालने वाली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की दिक्कतें और बदलती वैश्विक स्थितियां उन चुनौतियों में शामिल हैं जिनका आज विमानन उद्योग सामना कर रहा है। लेकिन इनसे इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दीर्घकालिक दिशा नहीं बदलेगी। विमानन कंपनी के नए मुख्य कार्य अधिकारी विली वॉल्श ने आज यह बात कही।
कार्यभार संभालने के एक दिन बाद कर्मचारियों को अपने पहले संबोधन के दौरान वॉल्श ने ये टिप्पणियां कीं। उनकी ये बातें ऐसे समय सामने आई हैं जब इंडिगो ने हाल में लंबी दूरी के अपने परिचालन में कुछ रणनीतिक बदलाव किया है। विमानन कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह लंबी दूरी के विमान बेड़े के इस्तेमाल में बदलाव के तहत दो वेट-लीज्ड (चालक दल, रख-रखाव और बीमा समेत पट्टे वाले) बोइंग 787-9 विमानों को तय समय से पहले ही नॉर्स अटलांटिक एयरवेज को वापस करने का फैसला कर चुकी है।
वॉल्श ने कहा, ‘आज विमानन क्षेत्र को एयरस्पेस की बदलती चुनौतियों, आपूर्ति श्रृंखला की दिक्कतों और दुनिया भर में बदलते हालात का सामना करना पड़ रहा है। इन वास्तविकताओं में हमें चुस्त, अनुशासित तथा मजबूत बने रहने की जरूरत है। अगर कुछ असर है, तो ये चीजें उन खूबियों को और मजबूत करती हैं जिनसे इंडिगो की पहचान बनी है – सुरक्षा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता, कामकाज में बेहतर प्रदर्शन और ग्राहकों को निरंतरता प्रदान करना।’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विमानन कंपनी की व्यापक अंतरराष्ट्रीय वृद्धि रणनीति बरकरार है। साथ ही उसकी आने वाले वर्षों में अधिक लंबी दूरी के गंतव्यों और वाइडबॉडी विमानों को शामिल करने की योजना है।
उन्होंने कहा, ‘अब जो चीज मुझे और भी उत्साहित करती हैं, वह है हमारे सामने मौजूद अवसर। चूंकि नए विमान बेड़े में शामिल होंगे और हमारा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क लगातार विस्तृत होगा, इंडिगो पहले की अपेक्षा भारत को दुनिया भर के और अधिक गंतव्यों से जोड़ेगी। हर नया मार्ग कनेक्टिविटी मजबूत करता है, लोगों और कारोबारों को एक-दूसरे के करीब लाता है और वैश्विक मंच पर गर्व से भारत का प्रतिनिधित्व करता है।’
भारतीय विमानन उद्योग पिछले एक साल से दो प्रमुख बाधाओं से जूझ रहा है – एयरस्पेस का व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखला की अड़चनें। अप्रैल 2025 में पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपना वायु क्षेत्र बंद करने के बाद से भारतीय उड़ानों को यूरोप, उत्तर अमेरिका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों के लिए अपने मार्ग में परिवर्तन करना पड़ा है।
दूसरी ओर पश्चिम एशिया के युद्ध ने उड़ान के लिए उपलब्ध रास्तों को और ज्यादा सीमित कर दिया है। लंबे मार्ग से उड़ने के कारण समय, ईंधन की खपत, चालक दल और नेविगेशन की लागत बढ़ गई है, विमान उपयोग कम हो गया है और भारतीय कंपनियां उन विदेशी विमानन कंपनियों की तुलना में नुकसान में हैं जो लगातार पाकिस्तान के वायु क्षेत्र का उपयोग कर सकती हैं।