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एचपीसीएल अभी नहीं खरीदेगी आंध्र में चीनी मिल

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Last Updated- December 09, 2022 | 4:29 PM IST

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) ने आंध्र प्रदेश में चार चीनी मिलों की खरीदारी योजना को स्थगित कर दिया है। कंपनी ने तरलता में कमी को देखते हुए यह कदम उठाया है।


कंपनी इन चार चीनी मिलों से एथेनॉल का उत्पादन करना चाहती थी ताकि उसे बाद में पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जा सके। सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनी को पेट्रोल में 5 फीसदी एथेनॉल मिश्रित करना अनिवार्य होगा। सरकार ने इस साल पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाकर 10 फीसदी करने की योजना बनाई है।

एचपीसीएल के अधिकारी ने बताया, ‘एथेनॉल के उत्पादन के लिए कंपनी ने आंध्र प्रदेश की चार कंपनियों को सूचीबध्द किया था। हालांकि मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए हम लोग अपने फैसले पर फिर से विचार-विमर्श कर रहे हैं।

आंध्र प्रदेश की चारों मिलें कार्य कर रही हैं और हम लोगों को डर है कि बिहार में हमने जिन चीनी मिलों की खरीदारी की है उसके मुकाबले आंध्र प्रदेश की मिलों में ज्यादा भुगतान करना होगा।’

देश की आधी आबादी को ईंधन की आपूर्ति करने वाली एचपीसीएल ने साल 2008 के मई महीने में बिहार में दो चीनी मिलों की खरीदारी की थी।

एचपीसीएल ने 95 करोड़ रुपये की लागत से उन दोनों मिलों की खरीदारी की थी। कंपनी उन मिलों के लिए अभी तक 9.5 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और वे बिहार सरकार द्वारा उन मिलों के आवंटन के लिए इंतजार कर रही है।

एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘हम लोगों ने आंध्र प्रदेश के चीनी मिलों में कुछ तकनीकी मूल्याकंन किया था लेकिन हमें यह बहुत ज्यादा आकर्षक नहीं लगा। हमने इन मिलों का फिर से मूल्याकंन करने की  योजना बनाई है।’

एथेनॉल की उपलब्धता कम होने के कारण एचपीसीएल कुछ अन्य चीनी मिलों के अधिग्रहण में जुटी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने साल 2007 के दिसंबर महीने में गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में संशोधन कर एक अधिसूचना जारी की थी कि चीनी मिलों को गन्ने से एथेनॉल का उत्पादन करना होगा।

आंध्र प्रदेश के कृष्णा और पश्चिमी गोदावरी जिलों में कुल 42 चीनी मिलें स्थित हैं जहां एथेनॉल उत्पादन इकाइयां हैं।

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First Published - January 1, 2009 | 10:40 PM IST

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