सरकार जनवरी 2010 से भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आकलन के लिए एक नये तरीकों के इस्तेमाल की योजना बना रही है।
इससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की जीडीपी आकलन में ज्यादा से ज्यादा सटीकता आ जाएगी। इस नई सीरीज के तहत कं पनी मामलों के मंत्रालय (एमसीए) द्वारा जारी आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल कंपनियों की ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम में किया जा चुका है, जिसे एमसीए 21 कहा जाता है।
फिलवक्त देशभर की 4 लाख कंपनियां एमसीए 21 के तहत सालाना रिटर्न फाइल करती हैं। इनमें उद्योग और सेवा क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हैं। सांख्यिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये कंपनियां कुल जीडीपी का एक चौथाई योगदान करती हैं।
सरकारी कंपनियां, जिसके द्वारा संग्रहित आंकड़े ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है, कुल जीडीपी का 21 फीसदी और 24 फीसदी योगदान करती हैं। इसलिए नई सीरीज के तहत पूरी जीडीपी का लगभग आधा आकलन किया जा सकेगा, जो मुख्य तौर पर प्राथमिक स्रोतों से होगा। इससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ जाएगी।
कृषि क्षेत्र का योगदान कुल जीडीपी में 18 फीसदी है। बाकी अनौपचारिक क्षेत्र का योगदान है, जिसके आंकड़े को संग्रहित करना सीधे तौर पर मुश्किल होता है। क्रिसिल लिमिटेड से जुड़े अर्थशास्त्री डी. के. जोशी ने कहा, ‘यह एक सकारात्मक कदम है। जीडीपी गणना क ा जो मौजूदा तरीका है, उसमें सुधार की जरूरत है।’
अभी सांख्यिकी मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वितीयक स्रोतों के जरिये यह आंकड़े जुटाती है। मिसाल के तौर पर, चार साल पहले उद्योग या किसी क्षेत्र विशेष में काम करने वाले लोगों का अनुमान लगाती है और सर्वेक्षण को अंजाम देती है। तब जाकर उत्पाद की गणना इसी आधार पर की जाती है। नई सीरीज में 2004-05 को आधार वर्ष माना जाएगा।