अमेरिका की प्रमुख वाहन कंपनी जनरल मोटर्स इंडिया अपनी दो दशक पुरानी भारत यात्रा के आखिरी पड़ाव में है। डेट्रॉइट की इस कार कंपनी ने 2017 में अपने भारतीय परिचालन को बंद कर दिया था। कंपनी अब पुणे के समीप तलेगांव में अपने विनिर्माण संयंत्र का परिचालन बंद करने की प्रक्रिया में है।
जीएम इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘तलेगांव विनिर्माण संयंत्र में जीएम वाहन, पावरट्रेन और सीकेडी का उत्पादन 24 दिसंबर से बंद हो जाएगा।’ उन्होंने कहा कि जीएम ने इस संयंत्र को बंद करने के लिए एक आवेदन भी जमा कराया है।
इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, ‘कंपनी ने निर्यात के लिए 31 अक्टूबर को इस संयंत्र में अंतिम मॉडल को तैयार किया था।’
जनरल मोटर्स भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाली शुरुआती वैश्विक कार विनिर्माताओं में शामिल थी। उसने देश में दो कारखाने खोले- गुजरात के हालोल में और पुणे के समीप तलेगांव में। कंपनी ने मूल्य के प्रति संवेदनशील भारतीय खरीदारों के लिए कई मॉडल उतारे। उदाहरण के लिए, शेव्रले बीट को उस दौरान भारत में सबसे छोटे डीजल इंजन के साथ खरीदा जा सकता था।
बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमत वाले तमाम मॉडलों को उतारने के बावजूद जीएम को जापान और दक्षिण कोरिया की प्रतिस्पर्धी वाहन कंपनियों द्वारा किनारे कर दिया गया। ऐसे में कंपनी बाजार में अपनी पैठ बेहतर नहीं कर पाई। वर्ष 2010 में उसकी बाजार हिस्सेदारी 4.7 फीसदी थी जो घटकर 2016 में लगभग 1 फीसदी रह गई। परिणामस्वरूप 2017 में कंपनी ने भारतीय बाजार से बाहर होने की घोषणा कर दी लेकिन उसने भारत से निर्यात को बरकरार रखा।
अमेरिका की इस वाहन कंपनी ने अपनी विनिर्माण इकाई को बेचने के लिए चीन की कंपनी ग्रेट वाल मोटर्स (जीडब्ल्यूएम) के साथ एक समझौता किया लेकिन उसमें अनिश्चितता बरकरार रही। भारत और चीन के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर नियामकीय बाधाओं के कारण इस समझौते को पूरा होने में काफी देरी हो गई। जीएम इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘दोनों कंपनियों ने इस सौदे के लेनदेन को पूरा करने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरियां हासिल करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार काम कर रही हैं ताकि इस विनिर्माण इकाई में कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित रह सकें।’
प्रवक्ता ने कहा कि इस इकाई में करीब 1,800 वेतनभोगी एवं दैनिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जीएम प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को एक पैकेज के साथ मदद करेगी।