जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन जैसे फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्मों के गिग वर्करों की कमाई पश्चिम एशिया संघर्ष बढ़ने के कारण घटने लगी है। तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडरों की किल्लत ने देशभर के रेस्तरां और क्लाउड किचन को अपना परिचालन सीमित करने या अस्थायी रूप से बंद करने के लिए मजबूर कर दिया है। कम किचन ऑर्डर तैयार कर रहे हैं। इससे डिलिवरी पार्टनरों को मंदी की आंच से जूझना पड़ रहा है।
स्विगी में पिछले तीन साल से डिलिवरी पार्टनर कुलदीप शर्मा ने कहा, ‘मैं आमतौर पर दो शिफ्ट में काम करता हूं- दोपहर 12-4 बजे और शाम 7-11 बजे। मुझे हर दिन लगभग 20-22 ऑर्डर मिलते थे। इससे करीब 1100 रुपये की कमाई हो जाती थी। अब 15-17 ऑर्डर पूरे करना भी मुश्किल हो गया है और कमाई घटकर लगभग 800-900 रुपये रह गई है।’ शर्मा ने कहा कि जिन कई रेस्तरां से वह अक्सर ऑर्डर उठाते थे, वे अब दिन भर के बजाय केवल शाम को ही काम कर रहे हैं।
जोमैटो और मैजिकपिन में काम करने वाली एक और डिलिवरी पार्टनर ने भी यही बात कही। उसने कहा कि वह शाम 4 बजे के बाद ही प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करती है और लगभग 600 रुपये कमाने के लिए हर दिन 13-14 ऑर्डर का टारगेट रखती है। उसने कहा, ‘13-14 ऑर्डर का टारगेट पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। रोज की कमाई मुश्किल से 500 रुपये ही पार कर पाती है।’
डिलिवरी वर्करों की चिंताओं को उठाते हुए गिग वर्कर्स एसोसिएशन (गिगडब्ल्यूए) जैसी यूनियनों ने कहा, ‘सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से ऑर्डर कम होने की संभावना है। इसलिए उनमें भारी गिरावट की आशंका है। चूंकि गिग वर्करों को काम के आधार पर भुगतान किया जाता है। इसलिए उनकी कुल कमाई में काफी कमी आ सकती है।’
गिग ऐंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (गिप्सू) ने श्रम मंत्रालय को इस समस्या से अवगत काया है। उसने कहा है कि रेस्टोरेंट बंद होने से ऑनलाइन ऑर्डर पूरे होने में 60 फीसदी तक की कमी आई है। कमर्शियल सिलिंडर की कमी ने रेस्टोरेंटों, ढाबे, क्लाउड किचन, केटरिंग सर्विस और स्ट्रीट वेंडर बंद कर दिए हैं, जिससे जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर 50-60 प्रतिशत फूड डिलीवरी के ऑर्डर घट गए हैं।”
फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म मैजिकपिन के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अंशु शर्मा ने भी कहा, ‘छोटे रेस्टोरेंट पर बुरा असर पड़ सकता है। वे हमारे आधार का बड़ा हिस्सा हैं। सीमित मेन्यू और कम काम के घंटों के साथ चलने वाले छोटे रेस्टोरेंटों को हमारी तरफ से मांग समर्थन मिलता रहेगा। हम रियल-टाइम एआई-इनेबल्ड सपोर्ट भी देंगे ताकि उन्हें रियल-टाइम वॉल्यूम इनसाइट्स मिलें और वे उसी हिसाब से और समझदारी से तैयारी कर सकें।’ कंपनी के लगभग 80,000 रेस्टोरेंट पार्टनर हैं और रोजाना औसतन 1.5 लाख ऑर्डर पूरे करती है।