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नहीं घटेंगे एफएमसीजी में दाम

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Last Updated- December 08, 2022 | 8:01 AM IST

रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) वर्ग में अपने पंसदीदा साबुन, डिटरजेंट या शैम्पू की खरीद के लिए कीमतों में कटौती का इंतजार कर रहे हैं ग्राहकों को अभी आगे भी 3 से 6 महीने तक रुकना होगा, क्योंकि प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने अभी रुक कर इंतजार करने की नीति अपना ली है।


पिछले एक साल में जिंसों की कीमतें बढ़ने से एफएमसीजी क्षेत्र में कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

हालांकि जिंसों की कीमतें सितंबर के बाद से काफी कम हो गई हैं और अब उन्हें केंद्र सरकार की ओर से उत्पादन शुल्क में 4 प्रतिशत की कटौती का भी लाभ मिल रहा है।

हालांकि ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियां जैसे हिन्दुस्तान युनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल), गोदरेज, डाबर और मैरिको की उत्पादन इकाइयां जम्मू, उत्तरांखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में हैं, जहां उत्पादन शुल्क लागू नहीं होता।

मैरिको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हर्ष मारीवाला का कहना है, ‘सरकार की ओर से उत्पादन शुल्क में कटौती का असल में हमें कोई फायदा नहीं मिलने वाला, क्योंकि हमारी इकाइयां वहां हैं, जहां उत्पाद शुल्क लागू नहीं होता।’

इसके अलावा उद्योग क्षेत्र पुराने माल से भी परेशान है, जिसे ऊंचे दामों पर खरीदा गया था। कैविनकेयर के प्रबंध निदेशक सी के रंगनाथन का कहना है, ‘सरकार ने काफी सकारात्मक कदम उठाए हैं और इससे हमें निश्चित रूप से मदद मिलेगी।

चूंकि हमारे पास अब भी साल की शुरुआत में ऊंचे दामों (130 डॉलर से 140 डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल जो मौजूदा समय में 43 डॉलर प्रति बैरल पर है) पर खरीदा गया माल पड़ा है, इसलिए कीमतों में कटौती करने में हमें आगे तीन महीने लग सकते हैं।’

जिन श्रेणियों में सेनवैट में कटौती के बाद दामों में कमी देखी जा सकती है, उनमें बॉटलिंग संयंत्र या फिर कुछ विशेष स्नैक्स निर्माता हैं जिनकी इकाइयां ग्राहकों और बाजारों के पास लगाई गई हैं।

बैली ब्रांड वाले बोतल बंद पानी के अलावा फ्रूटी और एप्पी बनाने वाली पारले एग्रो की संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य मार्केटिंग अधिकारी नाडिया चौहान का कहना है, ‘पिछले कई महीनों से हमारे ऊपर दाम बढ़ाने के कई तरह के दबाव हैं, लेकिन हम रुके हुए हैं। अब हमें राहत महसूस हो रही है, क्योंकि हमें कीमतें बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।’

डाबर के प्रवक्ता का कहना है, ‘इन प्रयासों से होने वाले लाभ का आकलन करने की जरूरत है और अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।’

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First Published - December 8, 2008 | 11:18 PM IST

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