नगदी की जबरदस्ती कमी झेल रही गोदरेज, डाबर और इमामी जैसी एफएमसीजी कंपनियों ने अब रिटेल चेनों को दिए जाने वाले कर्ज में कमी कर रही हैं।
ये कंपनियां अब विक्रेताओं को कम समय पर डिलीवरी दे रही हैं। साथ ही, उन्होंने डिलीवरी पैकेज की मात्रा को भी कम कर दिया है। वे अब डिलीवरी देते वक्त ही पूरे भुगतान की मांग कर रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने अब कर्ज चुकाने का वक्त भी कम कर दिया है।
मिसाल के तौर पर गोदरेज को ही ले लीजिए। कंपनी पहले हफ्ते में एक बार ही रिटेल चेन स्टोरों में सामान पहुंचाया करती थी। लेकिन अब वह हफ्ते में दो से तीन बार सामान पहुंचा रही है। कंपनी के सीओओ (मार्केटिंग एंड ऑपरेशंस) डॉ. आर.के. सिन्हा का कहना है कि, ‘हमने रिटेल चेनों के साथ सौदे करने के लिए अब ‘ऑन टाइम-इन फुल’ नीति अपनाई है। रिटेल चेन स्टोरों में समय पर माल पहुंच जाता है और समय पर पैसे भी मिल जाते हैं।’
दूसरी तरफ, इमामी जैसी दूसरी एफएमसीजी कंपनियां कर्ज चुकाने के समय को कम कर रही हैं। इमामी ग्रुप के निदेशक मोहन गोयनका का कहना है कि, ‘हमने अलग-अलग रिटेल चेनों के लिए अलग-अलग नीति बनाई है। अगर किसी रिटेल चेन के डिफॉल्टर होने का खतरा होता है, तो हम उसके लिए कर्ज चुकाने के वक्त को कम कर देते हैं।’
वहीं, डाबर ने एक कड़ी नीति बनाई है। वह पैसे मिलने पर ही सामान की डिलीवरी दे रही है। साथ ही, कुछ रिटेल चेन कंपनियों को अपना माल देने भी बंद कर दिया है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के पार्टनर और निदेशक आनंद रघुरमन का कहना है कि, ‘ऐसा करने के पीछे दो वजहें हैं।
पहली बात तो यह है कि मंदी की वजह से देसी प्राइवेट बैंकों ने कर्ज देना काफी कम कर दिया। इसी वजह से एफएमसीजी कंपनियों से रिटेलरों को कर्ज पर माल देना कम कर दिया। दूसरी वजह है, सुभिक्षा और विशाल जैसी रिटेल चेनों का कर्ज नहीं चुका पाना। इसलिए एफएमसीजी कंपनियां, रिटेल चेनों को लेकर सर्तकता से कदम उठा रही हैं।’